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बंगाल उपचुनाव में भाजपा आगे, टीएमसी ने बढ़ाई सियासी चर्चा

कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुरुआती बढ़त बना ली है। पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद भाजपा उम्मीदवार देवांशु पांडे प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे चल रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के किसी भी काउंटिंग एजेंट का मतगणना स्थल पर न पहुंचना सियासी गलियारों में नई चर्चाओं और अटकलों को जन्म दे रहा है। यह घटनाक्रम फलता उपचुनाव के चुनावी गणित को पूरी तरह से बदलने का संकेत दे रहा है।

मतगणना की सुरक्षा व्यवस्था

दक्षिण 24 परगना स्थित डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय में वोटों की गिनती रविवार सुबह कड़े पहरे के बीच शुरू हुई। प्रशासन ने निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। केंद्र के बाहर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी या हिंसक झड़प को रोका जा सके। अधिकारियों के अनुसार, मतगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 19 टेबल की व्यवस्था की गई है, जिसे कुल 21 राउंड में संपन्न किया जाएगा।

टीएमसी एजेंटों की गैर-मौजूदगी

सबसे चौंकाने वाला पहलू टीएमसी के काउंटिंग एजेंटों की अनुपस्थिति है। आमतौर पर बंगाल की राजनीति में चुनाव प्रक्रिया के हर चरण में दलों की सक्रिय भागीदारी रहती है। इस स्थिति ने कई राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। जानकारों का कहना है कि इसके पीछे टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान का पहले ही चुनावी मुकाबले से हटने का निर्णय मुख्य कारण हो सकता है। जब मुख्य मुकाबला करने वाला उम्मीदवार ही मैदान से हट जाए, तो बाकी कार्यकर्ताओं का उत्साह ठंडा पड़ना स्वाभाविक है।

चुनावी मुकाबले के समीकरण

  • भाजपा: अधिवक्ता देवांशु पांडे, जो कि पार्टी की ओर से मजबूती से बढ़त बनाए हुए हैं।
  • माकपा: शंभु कुड़मी के नेतृत्व में वाम मोर्चा अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है।
  • कांग्रेस: अब्दुल रज्जाक मोल्ला चुनावी मैदान में अपनी साख बचाने की जुगत में हैं।
  • टीएमसी: जहांगीर खान के हटने से यहां त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति लगभग खत्म हो चुकी है।

भाजपा की बढ़ी उम्मीदें

पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा में भाजपा पहले से ही 207 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में है। यदि फलता का यह उपचुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहता है, तो उनकी कुल संख्या 208 तक पहुंच जाएगी। भाजपा समर्थकों में भारी उत्साह है और मतगणना केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुट रहे हैं। पार्टी का मानना है कि यह जीत उनके विस्तारवादी एजेंडे को और अधिक बल देगी। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए परिसर के आसपास लोगों की आवाजाही को बेहद सीमित रखा है।

राजनीति पर क्या असर?

इस उपचुनाव के नतीजे न केवल सीटों के आंकड़ों को प्रभावित करेंगे, बल्कि यह दक्षिण 24 परगना के उस इलाके में सत्ता के संतुलन को भी दिखाएंगे, जिसे लंबे समय से एक विशेष दल का गढ़ माना जाता रहा है। शुरुआती रुझानों के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह विपक्षी दल के लिए राज्य के ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करने की शुरुआत है। आने वाले राउंड की गिनती के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि फलता की जनता ने अपना जनादेश किसके पक्ष में दिया है।

विशेषज्ञ दृष्टि: जहांगीर खान का अचानक चुनावी दौड़ से बाहर होना फलता सीट के पूरे समीकरण को एकतरफा बनाता दिख रहा है। भाजपा का शुरुआती बढ़त हासिल करना एक रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले विधानसभा सत्रों में चर्चा का विषय बनेगा।

अंतिम परिणाम आने तक मतगणना केंद्र पर सुरक्षा का घेरा बना रहेगा। जैसे-जैसे राउंड पूरे होंगे, तस्वीर साफ होती जाएगी। फिलहाल, सभी की निगाहें डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय की उन 19 टेबलों पर हैं, जहां से बंगाल की राजनीति की अगली दिशा तय हो रही है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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