ऑकलैंड,अंग भारत । भारतीय महिला हॉकी टीम ने एफआईएच महिला नेशंस कप 2025-26 का खिताब जीतकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी जगत में नया इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में मेजबान न्यूज़ीलैंड को 2-0 से मात देकर भारतीय टीम ने न केवल प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया, बल्कि अगले एफआईएच प्रो लीग सत्र के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली। कप्तान सलीमा टेटे के नेतृत्व में टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत से ही स्पष्ट संदेश दिया था कि वे यहां सिर्फ भाग लेने नहीं, बल्कि जीतने आई हैं। यह जीत भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व का बड़ा पल है क्योंकि पूरी टीम ने एक भी मैच हारे बिना अपनी শ্রেষ্ঠता साबित की है।
अजेय रही भारतीय टीम
भारतीय टीम का पूरे टूर्नामेंट में सफर किसी विजय गाथा से कम नहीं रहा। टीम ने अपनी रणनीति और कौशल के दम पर हर विपक्षी को पस्त किया। पूरे नेशंस कप के दौरान भारतीय रक्षापंक्ति और आक्रामक अग्रिम पंक्ति के बीच गजब का तालमेल देखने को मिला। उनके शानदार प्रदर्शन के कुछ प्रमुख पड़ाव निम्नलिखित रहे:
- लीग चरण में अमेरिका, जापान और उरुग्वे जैसी मजबूत टीमों को धूल चटाई।
- सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ अनुशासित खेल दिखाकर फाइनल का टिकट कटाया।
- फाइनल में मेजबान न्यूज़ीलैंड के दबाव को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
फाइनल की रणनीति
फाइनल मैच के शुरुआती मिनटों से ही भारतीय खिलाड़ियों ने मैच पर अपनी पकड़ बना ली थी। मैच के केवल चौथे ही मिनट में नवनीत कौर ने गोल दागकर टीम को जो बढ़त दिलाई, उसने न्यूज़ीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके ठीक बाद 15वें मिनट में युवा खिलाड़ी सुनेलिता टोप्पो ने दूसरा गोल कर भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया। इस दो गोल की निर्णायक बढ़त ने मैच की दिशा तय कर दी। इसके बाद भारतीय रक्षापंक्ति ने दीवार की तरह काम किया और न्यूज़ीलैंड को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया।
सलीमा टेटे का बयान
जीत के बाद कप्तान सलीमा टेटे बेहद भावुक और खुश नजर आईं। उन्होंने कहा, “यह ट्रॉफी हमारे लिए सिर्फ एक धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी कड़ी मेहनत का फल है। हमने प्रो लीग में वापसी का सपना देखा था और उसे पूरा करके हम बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं।” सलीमा का मानना है कि इस जीत ने टीम की मानसिकता को बदल दिया है। अब खिलाड़ी हार से डरने के बजाय जीत के लिए खेलने के आदी हो चुके हैं, जो आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में भी दिखाई देगा।
विश्व कप की तैयारी
यह जीत महज एक पदक तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेशंस कप में मिली इस कामयाबी से आगामी विश्व कप के लिए टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा। भारतीय टीम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी शक्ति बनकर उभरी है जिसे कमतर आंकना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए बड़ी भूल होगी। कोच सजॉर्ड मारिजन ने भी खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि दबाव को झेलने की उनकी क्षमता और पेनाल्टी कॉर्नर के सटीक इस्तेमाल ने जीत का रास्ता साफ किया।
हॉकी इंडिया का सम्मान
टीम की इस असाधारण उपलब्धि को देखते हुए हॉकी इंडिया ने खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए नकद पुरस्कारों की घोषणा की है। यह प्रोत्साहन राशि न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य के युवा खिलाड़ियों को भी हॉकी की ओर आकर्षित करेगी।
| श्रेणी | पुरस्कार राशि (प्रति व्यक्ति) |
|---|---|
| खिलाड़ी | तीन लाख रुपये |
| सहयोगी स्टाफ | डेढ़ लाख रुपये |
भविष्य का मार्ग
प्रो लीग में वापसी अब भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए नई चुनौतियों और अवसरों के द्वार खोलेगी। वहां दुनिया की शीर्ष टीमों के साथ नियमित रूप से खेलने का मौका मिलेगा, जिससे भारतीय खिलाड़ियों को अपना खेल और बेहतर करने में मदद मिलेगी। सलीमा टेटे और उनकी टीम ने साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो किसी भी बड़े लक्ष्य को भेदना मुश्किल नहीं है। यह केवल एक जीत नहीं, बल्कि भारतीय महिला हॉकी के स्वर्ण युग की एक दमदार शुरुआत है।








