नोएडा, अंग भारत। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने हाल ही में कार्गो उड़ान सेवा का औपचारिक शुभारंभ करके उत्तर भारत के लॉजिस्टिक्स और एविएशन सेक्टर में एक नया अध्याय लिख दिया है। बुधवार को चेन्नई से पहुंची पहली मालवाहक उड़ान का एयरपोर्ट पर पारंपरिक वाटर कैनन सलामी के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब केवल यात्रियों का केंद्र नहीं, बल्कि माल परिवहन (कार्गो) के लिए भी एक बड़े हब के रूप में अपनी ताकत दिखा रहा है। यह पहल न केवल विमानन क्षेत्र में हो रहे बदलावों को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए व्यापार की नई राहें भी खोल रही है।
कार्गो संचालन की शुरुआत
एयरपोर्ट प्रबंधन ने कार्गो सेवाओं को कुशलता से चलाने के लिए एफकॉम (Afcom) कंपनी के साथ साझेदारी की है। एफकॉम विशेष रूप से सप्लाई चेन और माल ढुलाई के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखती है। यह कंपनी अब अपने बोइंग 737-800 मालवाहक विमानों के बेड़े के साथ नोएडा से नियमित कार्गो उड़ानें संचालित करेगी। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समर्पित मालवाहक उड़ानों से उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के निर्यात में काफी समय बचेगा।
अत्याधुनिक कार्गो हब
कार्गो संचालन को सुव्यवस्थित और हाई-टेक बनाने के लिए एयर इंडिया सेट्स (Air India SATS) ने एयरपोर्ट परिसर के भीतर करीब 80 एकड़ के विशाल क्षेत्र में एक आधुनिक कार्गो हब तैयार किया है। इस सुविधा की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- वार्षिक क्षमता: पहले चरण में इस हब की वार्षिक क्षमता 2.55 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है।
- वेयरहाउसिंग: फ्रेट फॉरवर्डर्स और कारोबारियों के लिए बड़े पैमाने पर वेयरहाउस और कंसोलिडेशन सेंटर बनाए गए हैं।
- डिजिटल सिस्टम: शिपमेंट की लाइव ट्रैकिंग के लिए एडवांस डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है।
- ट्रकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: माल ढोने वाले ट्रकों की निर्बाध आवाजाही के लिए खास गलियारे और पार्किंग जोन विकसित किए गए हैं।
वैश्विक बाजारों से जुड़ाव
इस कार्गो हब का मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत के निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से सीधे जोड़ना है। एयर इंडिया सेट्स की योजना इसे मध्य पूर्व, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों के साथ जोड़ने की है। इसका सीधा फायदा नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और मेरठ जैसे औद्योगिक शहरों में स्थित कंपनियों को होगा। जब माल सीधे यहीं से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए भेजा जाएगा, तो लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और व्यापारिक दक्षता में इजाफा होगा।
नेटवर्क में लगातार विस्तार
कार्गो सेवाओं के साथ-साथ यात्री उड़ानों के मामले में भी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने अपनी गति तेज कर दी है। हाल ही में अकासा एयर ने नवी मुंबई और इंडिगो ने जम्मू के लिए अपनी उड़ानें शुरू की हैं। अब यात्रियों के पास बेंगलुरु, हैदराबाद, अमृतसर, जम्मू और नवी मुंबई जैसे महत्वपूर्ण शहरों तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध है। कनेक्टिविटी का यह विस्तार साबित करता है कि एयरपोर्ट प्रबंधन पूरी क्षमता के साथ परिचालन शुरू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आर्थिक और रोजगार अवसर
क्षेत्रीय विकास की बात करें तो, कार्गो हब और नए उड़ान मार्गों के शुरू होने से न केवल व्यापार को गति मिलेगी, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट से जुड़े व्यवसायों में उछाल आना तय है।
संक्षेप में कहें तो, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कार्गो परिचालन में कदम रखना उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह न केवल निर्यात गतिविधियों को सरल बनाएगा, बल्कि भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले महीनों में हम देखेंगे कि कैसे यह हब अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट के रूप में उभरता है।








