अररिया, अंग भारत। अररिया पुलिस ने नोएडा से गुवाहाटी जा रहे एक कंटेनर से करोड़ों रुपये के मोबाइल फोन चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए इसके मुख्य मास्टरमाइंड मोहम्मद नईम को हरियाणा के नूंह से गिरफ्तार कर लिया है। इस सफलता के साथ ही पुलिस ने लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य के 620 महंगे स्मार्टफोन, करीब सात लाख रुपये नकद, घटना में इस्तेमाल किया गया एक फर्जी ‘डाक पार्सल’ कंटेनर और एक स्कॉर्पियो कार भी जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस की उस व्यापक जांच का हिस्सा है जो पिछले कई महीनों से हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में फैले इस बड़े नेटवर्क को तोड़ने के लिए की जा रही थी।
चोरी की सुनियोजित साजिश
जांच में पता चला है कि यह कोई मामूली चोरी नहीं, बल्कि एक बेहद पेशेवर और सुनियोजित घटना थी। 6 जून को ग्रेटर नोएडा से ओप्पो और वनप्लस कंपनी के महंगे मोबाइल फोन लेकर एक कंटेनर गुवाहाटी के लिए रवाना हुआ था। इस गिरोह ने तकनीक और रूट की पूरी जानकारी रखने के बाद इस कंटेनर को अपना निशाना बनाया। गोरखपुर के पास ट्रक चालक और खलासी ने गिरोह के बाकी साथियों के साथ मिलकर वाहन का लॉक और सील क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने चतुराई से मोबाइल के पैकेटों को दूसरे कंटेनर में स्थानांतरित कर दिया जिस पर ‘डाक पार्सल’ का स्टीकर लगा था, ताकि रास्ते में किसी को संदेह न हो।
पुलिस की विशेष टीम
जब अररिया में कंटेनर की तलाशी ली गई, तो पता चला कि 1143 पैकेटों में से 612 पैकेट गायब थे। इस बड़े नुकसान के बाद अररिया एसपी जितेंद्र कुमार ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया। टीम ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों के लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर जाल बिछाया। नगर थाना प्रभारी और एसडीपीओ सुशील कुमार के नेतृत्व में लगातार की गई छापेमारी का परिणाम यह रहा कि मास्टरमाइंड नईम अंततः कानून की गिरफ्त में आ गया।
नईम का आपराधिक रिकॉर्ड
पकड़ा गया आरोपी मोहम्मद नईम एक शातिर अपराधी है जिसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। उसके पिछले रिकॉर्ड के अनुसार:
- फरीदाबाद पुलिस द्वारा उस पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था।
- आंध्र प्रदेश के कुरनूल में भी वह मोबाइल चोरी के एक मामले में वांटेड था।
- वह पहले भी कई वारदातों में शामिल रहा है और जमानत पर बाहर आकर फिर से अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया था।
गिरोह का नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह सिर्फ एक क्षेत्र में काम नहीं करता था, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और यूपी के ट्रांसपोर्ट हब पर उनकी नजर रहती थी। वे चलते ट्रक से महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान गायब करने में माहिर थे। इससे पहले की कार्रवाई में पुलिस ने 817 मोबाइल फोन बरामद किए थे और चार अन्य बदमाशों को गिरफ्तार किया था। उस दौरान थार और सियाज जैसी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई थीं, जो यह दर्शाती है कि इस गिरोह ने चोरी के माल को बेचकर काफी संपत्ति जुटाई थी।
अगली कानूनी कार्रवाई
फिलहाल, अररिया पुलिस की एक टीम अभी भी हरियाणा में डेरा डाले हुए है। पुलिस का लक्ष्य अब इस नेटवर्क के बाकी बचे सदस्यों को पकड़ना है। एसडीपीओ सुशील कुमार ने स्पष्ट किया है कि जब तक चोरी के सभी मोबाइल और इसमें शामिल अंतिम व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। इस मामले ने यह भी साबित कर दिया है कि अंतरराज्यीय अपराधों को रोकने के लिए राज्यों के बीच पुलिस तालमेल कितना प्रभावी होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स के बढ़ते दौर में इस तरह की ‘हाई-टेक’ चोरियां चुनौती बन रही हैं। कंपनियों को अब अपने ट्रांजिट कंटेनर्स में जीपीएस ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलार्म सिस्टम को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।








