काठमांडू,अंग भारत। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सुस्ता गांव इन दिनों कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में नेपाल द्वारा सुस्ता क्षेत्र में अपने सुरक्षा बलों की संख्या में इजाफा करने और नेपाली सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के वहां अचानक दौरे के बाद, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले में नेपाल से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य रूप से, नारायणी नदी के तट पर चल रहे तटबंध निर्माण और सीमावर्ती क्षेत्रों में हालिया सुरक्षा बदलावों के कारण दोनों देशों के बीच निगरानी का स्तर काफी ऊंचा हो गया है।
सुस्ता का सामरिक महत्व
सुस्ता इलाका हमेशा से भारत और नेपाल के बीच सीमा विवादों और संवेदनशील गतिविधियों का केंद्र रहा है। यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से नारायणी (गंडक) नदी के मुहाने पर बसा है, जिससे मानसून के दौरान यहां बाढ़ का खतरा लगातार बना रहता है।
- क्षेत्रीय संवेदनशीलता: सुस्ता की भौगोलिक स्थिति इसे सुरक्षा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण बनाती है।
- तटबंध विवाद: हाल ही में हुए तटबंध निर्माण कार्य पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद नेपाल ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया।
- स्थानीय चिंताएं: सीमावर्ती निवासियों के लिए यहां की सुरक्षा का सीधा असर उनके दैनिक जीवन और खेती पर पड़ता है।
सुरक्षा में क्यों हुई वृद्धि?
नेपाल के गृह मंत्रालय ने तीन जुलाई को एक निर्देश जारी किया, जिसके बाद नवलपरासी जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाई। पहले जहां सुस्ता में सशस्त्र पुलिस बल (APF) के केवल 25 जवान तैनात थे, वहीं अब इस संख्या को बढ़ाकर 40 कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला मानसून के दौरान होने वाली संभावित आपदाओं और क्षेत्र की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। हालांकि, सुरक्षा में यह बदलाव तटबंध के उस विवाद के तुरंत बाद हुआ है, जिसमें एसएसबी ने निर्माण कार्य रुकवाया था।
सादे कपड़ों में सेना
मामला तब और पेचीदा हो गया जब नेपाली सेना के ब्रिगेडियर जनरल यम बहादुर अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम बिना वर्दी (सादे कपड़ों में) सुस्ता पहुंची। इस दौरे की पूर्व सूचना स्थानीय सुरक्षा तंत्र को भी नहीं दी गई थी। जब एसएसबी के जवानों ने उनसे पूछताछ की, तो सादे कपड़ों में सेना की उपस्थिति ने भारतीय पक्ष के बीच सवाल खड़े कर दिए।
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के लिए ‘बिना वर्दी’ सेना का सीमा पर आना प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जाता है, इसीलिए भारत ने इस दौरे के वास्तविक उद्देश्य पर औपचारिक सवाल उठाए।
नेपाल का आधिकारिक पक्ष
भारतीय आपत्ति के जवाब में नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उनके अनुसार, यह सैन्य दौरा किसी भी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई या सीमा विवाद से प्रेरित नहीं था।
- आपदा प्रबंधन: नेपाल ने तर्क दिया कि यह दौरा मानसून की तैयारियों और संभावित प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम का आकलन करने के लिए था।
- सामान्य प्रक्रिया: नेपाली सेना के प्रवक्ता सहायक रथी राजाराम बस्नेत ने इसे देशव्यापी आपदा आकलन अभियान का एक छोटा हिस्सा बताया है।
- राजनयिक संवाद: नेपाल ने दोहराया है कि दोनों देशों के बीच का संवाद निरंतर बना हुआ है ताकि किसी भी तरह का गलतफहमी न फैले।
वर्तमान में क्या स्थिति?
सुस्ता सीमा पर वर्तमान स्थिति पूरी तरह से स्थिर है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं। हालांकि नेपाल इसे केवल प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन संबंधी गतिविधि बता रहा है, लेकिन एसएसबी ने अपनी निगरानी कड़ी कर दी है। नारायणी नदी के किनारे होने वाले निर्माण कार्यों पर दोनों देशों की नजर है, क्योंकि एक छोटा सा निर्माण भी सीमांकन के नियमों के तहत विवाद का कारण बन सकता है।
आने वाले दिनों में भारत और नेपाल के बीच स्थानीय स्तर पर फ्लैग मीटिंग या उच्च-स्तरीय चर्चा की संभावना बनी हुई है। दोनों देशों के स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे किसी भी विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुरक्षा में की गई यह वृद्धि फिलहाल बचाव की रणनीति के रूप में देखी जा रही है, न कि आक्रामक रुख के रूप में।








