शंभूगंज/बांका,अंगभारत। शंभूगंज प्रखंड में बकरीद का त्योहार इस बार न केवल धार्मिक उत्साह, बल्कि सामाजिक सौहार्द की एक नई मिसाल बनकर उभरा है। बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा के नाम से जाना जाता है, पर पूरे क्षेत्र की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों का सैलाब उमड़ पड़ा। लोग सुबह से ही नए कपड़ों में नमाज अदा करने पहुंचे और इबादत के बाद एक-दूसरे के गले मिलकर आपसी भाईचारे और शांति का संदेश दिया। इस दौरान पूरे इलाके में अमन-चैन की दुआएं मांगी गईं और हर तरफ खुशहाली का माहौल नजर आया।
त्योहार की सादगी और उमंग
त्योहार की रौनक सुबह की पहली किरण के साथ ही शुरू हो गई थी। मुस्लिम समुदाय के घरों में पारंपरिक व्यंजनों की महक बिखरी थी। सेवइयों की मिठास और खुशबू ने पर्व की खुशी को दोगुना कर दिया। सिर्फ बड़ों में ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों और युवाओं में भी खास उत्साह था।
- बच्चों ने रंग-बिरंगे कुर्ते-पायजामे पहनकर ईदगाहों की शोभा बढ़ाई।
- युवाओं ने सोशल मीडिया के बजाय घर-घर जाकर बड़ों से आशीर्वाद लेने की परंपरा को जीवित रखा।
- बाजारों में भी चहल-पहल रही, जहां खरीदारी का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा
शांति और सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सक्रिय था। शंभूगंज थाना क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और दंडाधिकारियों की तैनाती ने पर्व को सकुशल संपन्न कराने में बड़ी भूमिका निभाई। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए:
| प्रशासनिक अधिकारी | दायित्व |
|---|---|
| थानाध्यक्ष राज कुमार प्रसाद | क्षेत्रीय गश्त और कानून व्यवस्था |
| बीडीओ नीतीश कुमार | प्रशासनिक निगरानी |
| सीओ जुगनू रानी | संवेदनशील क्षेत्रों की मॉनिटरिंग |
महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा
सुरक्षा के लिहाज से खपड़ा, जोगनी, महथुडीह, चुटिया बेलारी, चुटिया पहाड़, कमड्डी, खानगा और कसबा जैसे लगभग 10 मुख्य स्थानों को विशेष निगरानी में रखा गया था। अवर निरीक्षक राममोहन सिंह और सौरभ कुमार की टीम ने लगातार गश्त की, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की गुंजाइश न रहे। अधिकारियों की अपील और आम जनता के सहयोग का ही परिणाम था कि कहीं से भी किसी भी प्रकार की विवाद या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
भाईचारे का असल संदेश
ईदगाह से बाहर निकलते ही जब नमाजियों ने एक-दूसरे को गले लगाया, तो वह दृश्य वाकई दिल जीत लेने वाला था। यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं थी, बल्कि इलाके की गंगा-जमुनी तहजीब को प्रदर्शित करने का एक माध्यम था। आज के दौर में जब छोटी-छोटी बातों पर तनाव की खबरें आती हैं, तब शंभूगंज की यह शांतिपूर्ण बकरीद हमें याद दिलाती है कि मिल-जुलकर रहने में ही असली खुशी है। लोग अपने धर्म की सीमाओं से बाहर निकलकर पड़ोसी और मित्रों के घर पहुंचे, जिन्होंने इस त्योहार को एक सामाजिक उत्सव में बदल दिया।
स्थानीय लोगों का सहयोग
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय बुद्धिजीवियों और समुदाय के अगुआ लोगों ने भी शांति बनाए रखने में अहम योगदान दिया। मस्जिद कमेटियों ने समय पर नमाज संपन्न कराने और आसपास सफाई रखने के लिए स्वयंसेवकों की नियुक्ति की थी। शांति समितियों की बैठक में लिए गए निर्णयों का पालन पूरी निष्ठा से किया गया। इस प्रकार, शंभूगंज ने न केवल बकरीद को हर्षोल्लास के साथ मनाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुखद और सुरक्षित माहौल की मिसाल भी पेश की।








