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निर्माण स्थल पर जंग लगे सरिया देख लोगों में चिंता, जांच की मांग तेज

निर्मली/सुपौल,अंग भारत। निर्मली अनुमंडल मुख्यालय में निर्माणाधीन प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन के निर्माण में इस्तेमाल हो रहे जंग लगे सरिया ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे ये सवाल केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। जब 14 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि खर्च की जा रही हो, तब सरिया जैसी बुनियादी निर्माण सामग्री में लापरवाही बरतना सीधे तौर पर भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण देने जैसा है।

निर्माण सामग्री पर सवाल

निर्माण स्थल पर पड़ी तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सरिया का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से जंग की चपेट में है। निर्माण कार्य में लगे विशेषज्ञों का मानना है कि जंग लगा हुआ सरिया कंक्रीट की पकड़ को कमजोर कर देता है। जब सरिया पुराना होता है, तो उसका व्यास (diameter) कम हो जाता है, जिससे उसकी भार सहने की क्षमता घट जाती है। यदि ऐसे सरिये का इस्तेमाल मुख्य संरचनात्मक स्तंभों या बीम में किया जाता है, तो यह भवन के ढहने का जोखिम पैदा कर सकता है।

लापरवाही के बड़े जोखिम

  • पकड़ में कमी: जंग लगने से सरिया और कंक्रीट के बीच की बॉन्डिंग कमजोर हो जाती है, जिससे दरारें आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • संरचनात्मक अस्थिरता: भवन समय से पहले जर्जर हो सकता है, जिससे सरकारी संपत्ति का भारी नुकसान होगा।
  • सुरक्षा संकट: भवन में रोजाना सैकड़ों लोग और सरकारी कर्मी काम करेंगे, ऐसे में कमजोर नींव किसी बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।

भ्रष्टाचार की आशंका

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना में मानकों की अनदेखी बिना मिलीभगत के संभव नहीं है। 14 करोड़ 53 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का आवंटन एक मजबूत और टिकाऊ भवन के लिए किया गया है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है ताकि लागत में कटौती कर मुनाफा कमाया जा सके। यह धांधली तब और चिंताजनक हो जाती है जब निर्माण कार्य स्वयं सरकारी परिसर के भीतर चल रहा हो।

जांच और निगरानी अनिवार्य

अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन इस मामले में सख्त रुख अपनाए। केवल औपचारिकता पूरी करना ही काफी नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र तकनीकी टीम द्वारा सरिया के नमूनों की जांच लैब में कराई जानी चाहिए। लोगों की मांग है कि:

  • तकनीकी जांच: निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोककर इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाए।
  • जवाबदेही तय हो: निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे कनीय अभियंता (JE) और सहायक अभियंता (AE) की भूमिका की जांच की जाए।
  • पारदर्शिता: कार्यस्थल पर उपयोग होने वाली सामग्री के इनवॉइस और गुणवत्ता प्रमाणपत्र सार्वजनिक किए जाएं।

प्रशासन से सीधी अपील

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में तत्काल संज्ञान नहीं लिया, तो वे बड़े आंदोलन की राह चुनेंगे। सरकारी भवनों का निर्माण जनता के कर (Tax) से होता है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त करना अक्षम्य है।

किसी भी निर्माण परियोजना की सफलता उसकी नींव और सामग्री की गुणवत्ता पर टिकी होती है। अगर निर्मली के इस नए कार्यालय भवन में अभी सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में ही यह भवन सरकारी धन की बर्बादी और विभागीय लापरवाही का एक दुखद उदाहरण बनकर रह जाएगा। प्रशासन को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई करनी ही होगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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