कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता तेज हो गई है। शुक्रवार को कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग ने अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर सियासी हलचल बढ़ा दी। इस कार्रवाई में एक रियल एस्टेट कंपनी, एक निर्माण संस्था और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के ठिकाने शामिल हैं।
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ईडी की कई टीमों ने शुरू की कार्रवाई
सुबह-सुबह सीजीओ कॉम्प्लेक्स से निकली ईडी की कई टीमें केंद्रीय बलों के साथ विभिन्न स्थानों पर पहुंचीं। अधिकारियों ने साल्ट लेक और कोलकाता के अलग-अलग इलाकों में कम से कम चार ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया।ईडी की यह कार्रवाई एक रियल एस्टेट कंपनी और उससे जुड़ी एक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर केंद्रित रही। अधिकारियों ने इन कंपनियों के दफ्तरों और संबंधित परिसरों में गहन जांच की।
वित्तीय गड़बड़ी के शक में जांच
सूत्रों के अनुसार यह सर्च ऑपरेशन कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेनदेन से जुड़े मामलों की जांच के लिए किया जा रहा है। इससे पहले भी इस कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े कई परिसरों में छापेमारी हो चुकी है।ईडी का मानना है कि चुनाव से पहले अवैध वित्तीय गतिविधियों और जमीन से जुड़े संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखना जरूरी है। इसी कड़ी में यह कार्रवाई की गई है।
आयकर विभाग की भी समानांतर कार्रवाई
ईडी के साथ-साथ आयकर विभाग ने भी कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार Debashish Kumar के आवास और कार्यालय को निशाना बनाया गया।आयकर विभाग की टीम सुबह उनके मनोहरपुकुर रोड स्थित घर पहुंची और वहां जांच शुरू की। इसके अलावा उनके चुनाव कार्यालय और मोतीलाल नेहरू रोड स्थित ऑफिस में भी तलाशी अभियान चलाया गया।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासत
विधानसभा चुनाव के बीच हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय एजेंसियों की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनाव के दौरान इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।हालांकि केंद्रीय एजेंसियों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह जांच के दायरे में आने वाले मामलों के आधार पर की जा रही है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल ईडी और आयकर विभाग दोनों ही अपने-अपने स्तर पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की कार्रवाई का असर जनमत पर भी पड़ सकता है।










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