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मनी लॉन्ड्रिंग पर नेपाल की धीमी कार्रवाई से FATF नाराज

काठमांडू,अंग भारत। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था फाइनान्सियल एक्सन टास्क फोर्स (FATF) के एशिया पैसेफिक समूह (APG) ने नेपाल को मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों के खिलाफ कमजोर कार्रवाई को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। एपीजी ने साफ कहा है कि यदि नेपाल ने तय समय के भीतर आवश्यक सुधार नहीं किए तो उसे ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाला जा सकता है।यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल पहले से ही FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल है और उस पर वैश्विक वित्तीय संस्थाओं की निगरानी बढ़ चुकी है। एपीजी ने नेपाल की प्रगति को निराशाजनक बताते हुए कहा कि सुधारों की रफ्तार बेहद धीमी है।

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काठमांडू में चल रही उच्चस्तरीय बैठक

नेपाल की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एपीजी ने इस बार अपने उप कार्यकारी सचिव डेविड सैनन के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल काठमांडू भेजा है। तीन दिनों तक चलने वाली ‘सपोर्ट बैठक’ सोमवार से शुरू हुई, जिसमें नेपाल सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों और एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, महान्यायाधिवक्ता कार्यालय, नेपाल राष्ट्र बैंक, नेपाली सेना, नेपाल प्रहरी और सम्पत्ति शुद्धीकरण अनुसन्धान विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

एपीजी ने जताई गहरी नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान एपीजी प्रतिनिधियों ने नेपाल की अब तक की प्रगति पर गहरी असंतुष्टि व्यक्त की। उनका कहना था कि ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल किए जाने के बाद भी नेपाल नीतिगत सुधार, कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में अपेक्षित सुधार नहीं कर पाया है।एपीजी ने विशेष रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी, जांच एजेंसियों की क्षमता वृद्धि और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में कमजोरी को लेकर चिंता जताई।

सितंबर 2026 की समीक्षा बेहद अहम

एपीजी ने स्पष्ट किया है कि सितंबर 2026 में होने वाली समीक्षा नेपाल के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इसे अंतिम उच्चस्तरीय हस्तक्षेप माना जा रहा है। यानी नेपाल के पास अब बहुत कम समय बचा है, जिसमें उसे अपने सुधारों को प्रभावी रूप से लागू करना होगा।एफएटीएफ ने 21 फरवरी 2025 को नेपाल को दो वर्षों के लिए ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था। उससे पहले नेपाल को 15 प्रमुख बिंदुओं पर सुधार के निर्देश दिए गए थे और वर्ष 2027 तक उन्हें पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी।

निवेश और अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने कहा कि सरकार ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने को सर्वोच्च प्राथमिकता मान रही है। उन्होंने माना कि इससे नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि और निवेश वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ा है।वित्त मंत्री के अनुसार, सरकार मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों में ठोस कार्रवाई करने का प्रयास कर रही है। हालांकि एपीजी का कहना है कि अब तक दर्ज मामलों और जांच की गति को देखते हुए प्रगति पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

दर्ज मामलों की संख्या पर भी सवाल

आंकड़ों के अनुसार, अब तक सम्पत्ति शुद्धीकरण विभाग की ओर से 121 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं कानून संशोधन के बाद पुलिस ने 21, एंटी करप्शन ब्यूरो ने 6 तथा वन एवं राजस्व अनुसन्धान विभाग ने एक-एक मामला दर्ज किया है।एपीजी अधिकारियों ने इन आंकड़ों को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि जटिल वित्तीय अपराधों के मामलों में उल्लेखनीय कार्रवाई नहीं दिख रही है। गौरतलब है कि नेपाल इससे पहले वर्ष 2011 में भी ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल हुआ था और 2014 में उससे बाहर निकलने में सफल रहा था।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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