नई दिल्ली,अंग भारत। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेनाओं की परिचालन दक्षता को मजबूत करने के लिए एक बड़ा निर्णय लेते हुए फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों को दोगुना करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब राजस्व से जुड़ी खरीद के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक वित्तीय सीमा तय की गई है। इससे सेना के स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।
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फील्ड कमांडरों को मिले अधिक अधिकार, फैसले होंगे तेज
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस कदम का उद्देश्य फील्ड स्तर पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना है। बढ़ी हुई वित्तीय शक्तियों से सैन्य इकाइयों को जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे ऑपरेशनल तैयारी को मजबूती मिलेगी।रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पहल सशस्त्र बलों को अधिक स्वायत्तता देने के साथ-साथ कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जमीनी स्तर पर खरीद और आपूर्ति से जुड़े निर्णयों में देरी कम होगी।
स्वदेशीकरण और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
‘रक्षा सेवाओं को वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन’ दस्तावेज जारी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। उन्होंने कहा कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशीकरण को मजबूती देगा।इस नई व्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका को और अधिक प्रोत्साहित करने की योजना है।
रक्षा खरीद प्रक्रिया में आएगी तेजी
मंत्रालय के अनुसार वित्तीय शक्तियों में यह बदलाव वर्ष 2021 के बाद सबसे बड़ा संशोधन है। इसका उद्देश्य मौजूदा आवश्यकताओं के अनुसार रक्षा खरीद प्रक्रिया को तेज करना है। संशोधित रक्षा खरीद मैनुअल के साथ यह प्रणाली और अधिक प्रभावी और समयबद्ध होगी।वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को विकेंद्रीकृत करने के लिए नए सक्षम वित्तीय अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया को और सरल बनाया गया है।
उच्च स्तरीय बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस निर्णय को सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।











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