सुपौल,अंग भारत। बिहार के सुपौल जिले के अंतर्गत आने वाले गढ़ बरूआरी रेलवे स्टेशन पर बुनियादी यात्री सुविधाओं की भारी कमी और महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर स्थानीय लोगों और युवा कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव लक्ष्मण कुमार झा के नेतृत्व में सोमवार को कार्यकर्ताओं ने सीधे गढ़ बरूआरी रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेल अधीक्षक के जरिए रेल प्रशासन को एक अल्टीमेटम पत्र सौंपा, जिसमें साफ चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द ही ट्रेनों के ठहराव और फुट ओवरब्रिज (FOB) जैसी बुनियादी सुविधाओं को मंजूरी नहीं मिली, तो पूरे कोसी क्षेत्र में उग्र आंदोलन और रेल चक्का जाम किया जाएगा।
समस्याओं से जूझता स्टेशन
गढ़ बरूआरी रेलवे स्टेशन इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण संपर्क केंद्र है, लेकिन सालों से यह उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। सीमावर्ती इलाके के हजारों ग्रामीण रोजाना इस स्टेशन से सफर करते हैं, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। न तो यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त शेड हैं और न ही रात के समय स्टेशन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। सबसे बड़ी समस्या एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की है, जिसके चलते लोगों को लंबी दूरी तय करने के लिए पहले सहरसा या दरभंगा जाना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं।
क्या हैं मुख्य मांगें?
युवा कांग्रेस और स्थानीय संघर्ष समिति ने रेल प्रशासन के सामने एक स्पष्ट मांग पत्र रखा है। इस मांग पत्र में उन सभी लंबित मुद्दों को उठाया गया है जो सीधे तौर पर आम जनता के दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। मुख्य मांगों की सूची इस प्रकार है:
- वैशाली एक्सप्रेस का ठहराव: उत्तर भारत को जोड़ने वाली इस प्रतिष्ठित ट्रेन का ठहराव गढ़ बरूआरी स्टेशन पर सुनिश्चित किया जाए ताकि स्थानीय लोगों को दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिल सके।
- पुरवइया एक्सप्रेस का विस्तार: सीमावर्ती क्षेत्र के रेल यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन का स्थायी परिचालन सहरसा के बजाय ललितग्राम से शुरू किया जाए।
- फुट ओवरब्रिज का निर्माण: यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टेशन पर जल्द से जल्द फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाया जाए।
- जोगबनी एक्सप्रेस का ठहराव: जोगबनी एक्सप्रेस को गढ़ बरूआरी रेलवे स्टेशन पर रोकने की अनुमति दी जाए ताकि व्यापारिक गतिविधियों को बल मिल सके।
- नई रात्रिकालीन ट्रेन: ललितग्राम से राजधानी पटना के बीच एक नई रात्रिकालीन ट्रेन सेवा शुरू की जाए जिससे छात्रों, मरीजों और व्यापारियों को सुबह पटना पहुंचने में आसानी हो।
सफर में सुरक्षा का संकट
स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज न होने की वजह से यात्रियों को जान जोखिम में डालकर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाना पड़ता है। कई बार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी सामान के साथ पटरियां पार करते हुए देखा जा सकता है, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे को दावत दे सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब दो ट्रेनें एक साथ विपरीत दिशाओं से आती हैं, तब स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। रेलवे अधिकारियों को बार-बार इस खतरे से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
क्यों जरूरी है बदलाव?
भौगोलिक दृष्टिकोण से सुपौल का यह इलाका बाढ़ प्रभावित और आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है। कोसी महासेतु के चालू होने के बाद से लोगों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। ट्रेनें तो शुरू हुईं, लेकिन उनके ठहराव और समय सारिणी को लेकर स्थानीय जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया। यदि गढ़ बरूआरी जैसे स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव दिया जाता है, तो स्थानीय किसानों को अपनी फसल बाहर भेजने में मदद मिलेगी और बीमार मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों में जाने की सुविधा होगी।
पहले मिले कोरे आश्वासन
युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव लक्ष्मण कुमार झा ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पहले भी दो बार समस्तीपुर के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को इन समस्याओं को लेकर मांग पत्र भेजा गया था। हर बार प्रशासनिक स्तर पर जल्द कार्रवाई करने का केवल मौखिक भरोसा दिया गया, पर धरातल पर कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ। रेलवे के इस उदासीन रवैये के कारण स्थानीय जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है, जिसे अब और अधिक दबाया नहीं जा सकता।
आंदोलन की सीधी चेतावनी
जनता के सब्र का बांध अब टूट रहा है। लक्ष्मण कुमार झा ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि आगामी दस दिनों के भीतर रेलवे प्रशासन ने इन जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो युवा कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (GM) से मिलकर विरोध दर्ज कराएगा। इसके बाद भी अगर मामले को अनसुना किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से रेल चक्का जाम जैसा कदम उठाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान मनोज कुमार, राजू कुमार, ललित, मंगल, संतोष कुमार, अजीत कुमार झा, दीपक कुमार, चंदन कुमार, मनीष कुमार और संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और युवा उपस्थित थे।








