गुवाहाटी, अंग भारत। असम के गुवाहाटी में पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 13 लाख रुपये के जाली भारतीय नोट बरामद किए हैं। यह कार्रवाई राजधानी के पॉश इलाके पंजाबाड़ी में अंजाम दी गई, जहां उत्तर प्रदेश के कानपुर से आए तीन तस्कर नकली नोटों की बड़ी खेप खपाने की फिराक में थे। पुलिस ने न केवल जाली नोटों का जखीरा जब्त किया, बल्कि मौके से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क की परतें उधेड़ना शुरू कर दिया है।
पकड़ी गई नकली खेप
गुवाहाटी पुलिस को लंबे समय से जाली नोटों के परिचालन के बारे में गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। पंजाबाड़ी इलाके में हुई इस कार्रवाई ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने जब संदिग्धों की तलाशी ली, तो उनके पास से 500 रुपये और अन्य मूल्यवर्ग के नकली नोटों का एक बड़ा भंडार मिला। जब्त की गई कुल राशि 13 लाख रुपये आंकी गई है। यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का शहर के भीतर मिलना स्थानीय बाजारों की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है।
वाहन और संदिग्धों की गिरफ्तारी
पुलिस की जांच में यह साफ हुआ है कि आरोपी इस गोरखधंधे के लिए अंतर्राज्यीय परिवहन का इस्तेमाल कर रहे थे। मौके से एक कार भी जब्त की गई है, जिस पर उत्तर प्रदेश का पंजीकरण नंबर है। पुलिस का मानना है कि इस गाड़ी का इस्तेमाल न केवल माल ढुलाई के लिए, बल्कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए भी किया जा रहा था।
- गिरफ्तार आरोपी: तीन (कानपुर, उत्तर प्रदेश निवासी)।
- बरामद राशि: 13 लाख रुपये के जाली नोट।
- जब्त संपत्ति: एक संदिग्ध वाहन (यूपी नंबर प्लेट)।
- स्थान: पंजाबाड़ी, गुवाहाटी।
जाली नोटों का स्रोत
अधिकारी अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इन नोटों की छपाई कहां हो रही थी। प्राथमिक पूछताछ में आरोपियों ने कुछ अहम नाम और ठिकानों के संकेत दिए हैं, जिसके आधार पर छापेमारी तेज कर दी गई है। यह गिरोह सिर्फ गुवाहाटी ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में था। यह नेटवर्क काफी संगठित लग रहा है, जो डिजिटल युग में भी पुराने ढर्रे पर नकली नोटों के जरिए अर्थव्यवस्था को चपत लगाने की कोशिश कर रहा है।
खुफिया एजेंसियों की सतर्कता
नकली नोटों का कारोबार देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक दीमक की तरह है। राष्ट्रीय जांच एजेंसियां भी अब गुवाहाटी पुलिस के साथ समन्वय बिठाकर इस केस की छानबीन कर रही हैं। सवाल यह है कि आखिर 13 लाख रुपये की यह नकली खेप इतनी आसानी से उत्तर प्रदेश से गुवाहाटी तक कैसे पहुंच गई? क्या इसमें किसी स्थानीय गिरोह का भी हाथ है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे कर सकते हैं।
कैसे पहचानें नकली नोट?
आम जनता को भी ऐसे मामलों में जागरूक रहना चाहिए। नकली नोटों को पहचानने के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:
- वाटरमार्क: नोट को रोशनी के सामने रखने पर महात्मा गांधी की छवि साफ दिखनी चाहिए।
- धागे जैसी पट्टी: असली नोट में सुरक्षा धागा होता है जो नोट को थोड़ा झुकाने पर रंग बदलता है।
- उभरा हुआ प्रिंट: गांधी जी की तस्वीर और अशोक स्तंभ के चिन्ह छूने पर उभरे हुए महसूस होते हैं।
- सीरियल नंबर: नोट के नंबर का आकार और प्रिंटिंग की स्पष्टता ध्यान से देखें।
भविष्य की सुरक्षा योजना
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गुवाहाटी में ऐसे गिरोहों को किसी भी हाल में पनपने नहीं दिया जाएगा। शहर के बॉर्डर पॉइंट्स और संदिग्ध ठिकानों पर पुलिस गश्त और कड़ी कर दी गई है। आने वाले समय में अवैध करेंसी के कारोबार से जुड़े हर लिंक को खत्म करने के लिए पुलिस एक बड़े ‘क्लीनअप’ अभियान की योजना बना रही है। यह मामला एक चेतावनी है कि सतर्कता ही इन अपराधियों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।








