गुवाहाटी,अंग भारत। गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एलजीबीआईए) पर सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी सेंध उस समय नाकाम कर दी गई, जब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने मुंबई जाने की फिराक में दो बांग्लादेशी नागरिकों को रंगे हाथों पकड़ लिया। ये दोनों आरोपी मुंबई जाने वाली अकासा एयर की फ्लाइट में सवार होने के लिए टर्मिनल-2 पर मौजूद थे, तभी सुरक्षा जांच के दौरान उनकी संदिग्ध हरकतों और दस्तावेजों ने सीआईएसएफ के जवानों का ध्यान खींच लिया। पूछताछ में उनकी पहचान राणा मोल्ला और माफूजा अख्तर लीमा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले हैं।
फर्जी दस्तावेजों का बड़ा जाल
एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा अधिकारियों ने जब इन यात्रियों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की, तो उनके होश उड़ गए। दोनों के पास से भारतीय आधार कार्ड बरामद हुए, जो पहली नजर में ही फर्जी प्रतीत हो रहे थे। सवाल यह है कि आखिर कोई विदेशी नागरिक इतनी आसानी से भारतीय पहचान पत्र कैसे हासिल कर लेता है? इन दस्तावेजों की गुणवत्ता और उनमें दी गई जानकारी पूरी तरह से संदिग्ध थी, जिसके बाद सीआईएसएफ ने तुरंत कदम उठाते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया और आगे की गहन जांच के लिए आजारा पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस की जांच का दायरा
आजारा पुलिस इस पूरे मामले को एक बड़े रैकेट के रूप में देख रही है। पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र यह है कि आखिर इन लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क कौन सा है? क्या इनके पास कोई स्थानीय मददगार था या कोई संगठित गिरोह सक्रिय है जो पैसे लेकर विदेशियों को भारतीय पहचान दिला रहा है? पुलिस अब इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है:
- फर्जी आधार कार्ड बनवाने के लिए इन्होंने किन केंद्रों या बिचौलियों की मदद ली।
- क्या मुंबई जाने के पीछे इनका कोई विशेष मकसद था या ये किसी बड़े सिंडिकेट के मोहरे हैं।
- भारत में इनके पिछले संपर्क और इनकी गतिविधियों का रिकॉर्ड क्या है।
सुरक्षा में बढ़ती सख्ती
गुवाहाटी एयरपोर्ट से इस तरह की गिरफ्तारी कोई पहली घटना नहीं है। पूर्वोत्तर का यह प्रमुख एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब होने के कारण लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहता है। हाल के दिनों में बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर यात्रा करने के प्रयास बढ़े हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई अड्डों पर अब चेकिंग के दौरान केवल टिकट और आईडी देखना पर्याप्त नहीं है। सीआईएसएफ ने अब बायोमेट्रिक मिलान और दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन को और अधिक सख्त कर दिया है ताकि किसी भी तरह की घुसपैठ को रोका जा सके।
अंतरराज्यीय नेटवर्क का खतरा
जांच एजेंसियों को इस बात की प्रबल आशंका है कि यह मामला एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट से जुड़ा हो सकता है। अक्सर ऐसे मामलों में देखा गया है कि जो लोग फर्जी पहचान पत्र बनाते हैं, वे केवल एक राज्य तक सीमित नहीं होते। उनका जाल देश के अलग-अलग कोनों तक फैला होता है। आजारा पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां अब मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या ये दोनों आरोपी किसी आपराधिक मंशा से मुंबई जा रहे थे या फिर वे भारत के किसी अन्य हिस्से में बसने की तैयारी में थे।
क्या है आगे की राह?
इस घटना ने देश की आंतरिक सुरक्षा के दावों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। जब लोग फर्जी आधार कार्ड लेकर विमानों में यात्रा करने की हिम्मत कर सकते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक खामियों को दर्शाता है। आम नागरिक के तौर पर यह समझना जरूरी है कि डिजिटल पहचान पत्र होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी जांच-परख नहीं होगी। सुरक्षा एजेंसियां अब पहले से कहीं ज्यादा सतर्क हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में उन सभी ठिकानों पर छापेमारी की जा सकती है, जहां से ये फर्जी दस्तावेज जारी किए गए हैं।








