भागलपुर,अंग भारत। भागलपुर जिले में मानसून की सक्रियता ने किसानों के मुरझाए चेहरों पर फिर से रौनक लौटा दी है। बुधवार को हुई झमाझम बारिश ने न केवल भीषण गर्मी से राहत दी है, बल्कि धान की खेती के लिए सबसे जरूरी नमी भी प्रदान कर दी है। अब किसान खेतों की जुताई और धान का बिचड़ा डालने के काम में तेजी से जुट गए हैं। जून महीने में बारिश की बेरुखी और सूखे जैसे हालात ने किसानों के माथे पर बल डाल दिए थे, जहां उन्हें फसल बचाने के लिए महंगे डीजल का सहारा लेकर पंपसेट चलाने पड़ रहे थे। अब कुदरत की मेहरबानी से उन्हें एक बड़ी राहत मिली है और खरीफ सीजन की उम्मीदें फिर से परवान चढ़ने लगी हैं।
मानसून की वापसी और राहत
लंबे समय से बादलों को ताक रहे भागलपुर के किसानों के लिए यह बारिश संजीवनी की तरह है। खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस बार खरीफ फसल का चक्र देरी से शुरू होने का खतरा था, जिसे मानसून ने समय रहते संभाल लिया है।
- खेतों में नमी: मिट्टी में पर्याप्त नमी आने से जुताई आसान हो गई है।
- लागत में कमी: डीजल और बिजली का खर्च बचेगा, जिससे किसानों की जेब पर बोझ कम होगा।
- समय पर बुआई: बिचड़ा डालने का काम अब सही समय पर पूरा हो सकेगा।
कृषि विभाग की सक्रियता
धान की बंपर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। विभाग ने यह सुनिश्चित करने की पहल की है कि किसानों को प्रमाणित बीज और सही मात्रा में खाद समय पर मिल सके। जुलाई के पहले सप्ताह तक बिचड़ा लगाने का जो लक्ष्य रखा गया है, उसके पूरा होने की प्रबल संभावनाएं दिख रही हैं। किसानों का अनुभव बताता है कि अगर समय पर धान की रोपाई हो जाए, तो आगे चलकर सूखे या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना आसान हो जाता है। सरकारी स्तर पर मिल रही यह मदद किसानों का मनोबल बढ़ा रही है।
मौसम का मिजाज और सलाह
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मौसम जानकारों ने आने वाले पांच दिनों तक अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किसानों के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव साझा किए हैं ताकि वे इस बारिश का अधिकतम लाभ उठा सकें:
क्या करें किसान?
- जिनके पास सिंचाई के साधन हैं, वे मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों का बिचड़ा डालें।
- तैयार बिचड़ों को सूखने न दें, जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई जारी रखें।
- ‘सबौर मोती धान’ और ‘सबौर सोना’ जैसी किस्मों पर ध्यान दें, जो कम पानी में भी अच्छा परिणाम देती हैं।
वज्रपात से रहें सावधान
बारिश के साथ-साथ प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मानसून के दौरान अक्सर आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने अपील की है कि किसान भाइयों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
“खेतों में काम करते समय यदि गरज के साथ बारिश हो, तो पेड़ के नीचे छिपने की गलती न करें। किसी सुरक्षित स्थान या पक्के घर में शरण लेना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय है।”
प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन टीम को किसी भी आपात स्थिति के लिए अलर्ट पर रखा गया है। सतर्कता और सही कृषि तकनीकों के मेल से ही इस साल की धान की खेती को सफल बनाया जा सकता है। किसानों का उत्साह यह बताता है कि वे आने वाली चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।








