गुवाहाटी,अंग भारत। कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन ने गुवाहाटी के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले निवासियों के लिए एक सख्त अलर्ट जारी किया है। शहर के भौगोलिक सर्वेक्षण में 366 भूस्खलन संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है, जहाँ लगातार हो रही बारिश के कारण जान-माल का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने इन जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की है।
मानवीय गतिविधियों का प्रभाव
हालिया सर्वेक्षण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, गुवाहाटी में 95 प्रतिशत भूस्खलन की घटनाएं प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप का परिणाम हैं। केवल 5 प्रतिशत मामलों में ही प्राकृतिक कारकों को जिम्मेदार माना जा सकता है। पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई और ढलानों पर बिना किसी सुरक्षा मानकों के किए जा रहे निर्माण कार्य शहर की भौगोलिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।
प्रमुख मानवीय कारण:
- अनियोजित निर्माण कार्य और नींव की खुदाई।
- पहाड़ी ढलानों से पेड़ों की कटाई।
- जल निकासी की खराब व्यवस्था, जिससे मिट्टी का कटाव होता है।
- तेजी से बढ़ता अनियंत्रित शहरीकरण।
चिह्नित संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र
प्रशासन ने उन 20 प्रमुख क्षेत्रों की सूची जारी की है जहाँ स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक है। इनमें से कुछ स्थानों पर भूस्खलन की संभावना का स्तर बहुत अधिक है। खारघुली जैसे इलाके इस सूची में शीर्ष पर हैं, जहाँ अकेले 77 ऐसे स्थल पाए गए हैं जो बारिश के दौरान कभी भी ढह सकते हैं।
| क्षेत्र का नाम | संवेदनशील स्थलों की संख्या |
|---|---|
| खारघुली | 77 |
| नूनमाटी | 40 |
| नरेंगी | 37 |
| खानापाड़ा | 33 |
| मालीगांव | 31 |
ढीली ढलानें और हरियाली
भूगर्भीय विश्लेषण से पता चलता है कि इन ढलानों की संरचना ही ऐसी है कि वे भारी दबाव नहीं झेल पातीं। करीब 88 प्रतिशत ढलानों का झुकाव 60 डिग्री तक है, जो मिट्टी खिसकने के लिए आदर्श स्थिति बनाता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 45 प्रतिशत संवेदनशील ढलानों पर कोई पेड़-पौधा नहीं है।
मिट्टी को पकड़कर रखने वाले पौधों के अभाव में, 36 प्रतिशत क्षेत्रों में केवल घास बची है। केवल 19 प्रतिशत क्षेत्र ही ऐसे हैं जहाँ पेड़ मौजूद हैं जो ढलानों को मजबूती दे रहे हैं। जब बारिश होती है, तो बिना जड़ वाले ये ढलान पानी सोखकर दलदल जैसे हो जाते हैं और सीधे नीचे गिरने लगते हैं।
गूगल अर्थ से निगरानी
प्रशासन ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहारा लिया है। इन सभी 366 स्थलों को ‘गूगल अर्थ’ पर मैप किया गया है ताकि किसी भी तरह की हलचल या आपदा की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। जिला प्रशासन के अनुसार, 74 प्रतिशत चिन्हित स्थलों पर अब तत्काल सुधार या सुरक्षात्मक हस्तक्षेप की जरूरत है।
आम लोगों के लिए सलाह
प्रशासन की चेतावनी का सीधा अर्थ है—अपनी सुरक्षा के प्रति स्वयं जिम्मेदार बनें। ढलानों के पास घर होने की स्थिति में, बारिश के समय सतर्क रहें और किसी भी तरह की दरारें या मिट्टी गिरने की आवाज सुनने पर तुरंत घर खाली कर दें।
निष्कर्ष और जिम्मेदारी
गुवाहाटी की पहाड़ियाँ शहर की खूबसूरती का हिस्सा हैं, लेकिन आज वे एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी हैं। केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि पहाड़ों का दोहन भविष्य के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बन सकता है। वृक्षारोपण और वैज्ञानिक भूमि उपयोग योजनाएं ही इस शहर को प्राकृतिक आपदाओं से बचा सकती हैं। जब तक निर्माण कार्यों में पहाड़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक यह चेतावनी बनी रहेगी।








