एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और ट्रस्ट पर कार्रवाई की उठाई मांग
नई दिल्ली,अंग भारत। कांग्रेस ने अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। साथ ही मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस ने सरकार और ट्रस्ट पर लगाए गंभीर आरोप
पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने 8 जून को हुई बैठक में संयुक्त रूप से पत्र भेजने का निर्णय लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और मंदिर ट्रस्ट मामले में उच्च पदों पर बैठे लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी जा रही है।उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच तभी संभव होगी जब इसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश के अधीन कराई जाए।
सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी उठाए सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 चोरी की घटनाएं दर्ज हैं, जो केवल 40 दिनों की अवधि से जुड़ी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतने कम समय में इतनी घटनाएं सामने आई हैं तो पिछले साढ़े पांच वर्षों के दौरान हुए चढ़ावे का पूरा हिसाब कौन देगा।कांग्रेस का आरोप है कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा के लिए निर्धारित मानक प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संबंध में एसबीआई द्वारा दी गई चेतावनी को भी नजरअंदाज किया गया।
ट्रस्ट भंग करने और स्वतंत्र ऑडिट की मांग
कांग्रेस ने इस मामले में कई प्रमुख मांगें भी रखीं। पार्टी ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट को भंग किया जाए, शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और मंदिर में प्राप्त सभी दान का स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराया जाए।इसके अलावा कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से भी इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मामले पर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
राम मंदिर से जुड़े इस मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। फिलहाल संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन सकता है।










