तेहरान/वाशिंगटन,अंग भारत। ईरान के केशम द्वीप के पास हुए रहस्यमयी धमाकों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुँचा दिया है। ये धमाके कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि ईरान के लिए एक सीधे चेतावनी संकेत की तरह हैं। इस जलमार्ग की महत्ता दुनिया के लिए इतनी अधिक है कि यहाँ की एक छोटी सी हलचल भी वैश्विक तेल आपूर्ति को ठप कर सकती है। मौजूदा हालात को देखते हुए, ईरान ने अब आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है और अपनी संसद में एक कड़े विधेयक पर विचार कर रहा है, जिसका उद्देश्य इस इलाके में अमेरिकी और इजरायली जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना है।
होर्मुज की बदलती राजनीति
ईरानी संसद में विचाराधीन यह प्रस्तावित कानून क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति को पलटने की क्षमता रखता है। इस विधेयक की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों के लिए जलमार्ग को पूरी तरह प्रतिबंधित करना।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाने का प्रावधान।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के सुरक्षा नियंत्रण को और अधिक कठोर बनाना।
ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ का मानना है कि अमेरिका का दोहरा रवैया ही इस भरोसे की कमी की असली जड़ है। गालिबफ ने वाशिंगटन पर आरोप लगाया है कि वे एक तरफ कूटनीति की बातें करते हैं, तो दूसरी तरफ निरंतर सैन्य धमकी देकर माहौल को बिगाड़ते रहते हैं।
किरमान में हुई गिरफ्तारियां
सिर्फ होर्मुज ही नहीं, बल्कि ईरान की आंतरिक सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। ईरान के खुफिया मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि किरमान प्रांत में मोसाद (इजरायल की खुफिया एजेंसी) के लिए काम करने के संदेह में 21 लोगों को पकड़ा गया है। यह घटना दर्शाती है कि ईरान किस तरह अपने भीतर मौजूद कथित जासूसी नेटवर्क को नष्ट करने के लिए कमर कस चुका है।
केशम द्वीप पर धमाके
गुरुवार की रात दक्षिणी केशम द्वीप पर हुए दो भीषण धमाकों ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। ये धमाके होर्मोज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर हुए, जो सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील इलाका है। होर्मोजगन के राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक मामलों के डिप्टी गवर्नर अहमद नफीसी ने इस घटना की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि ईरानी सुरक्षा बल दुश्मन की सेना के साथ हुई एक मुठभेड़ की भी जांच कर रहे हैं, जो धमाकों से ठीक पहले हुई थी। यह साफ है कि ईरान इन धमाकों को केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुरक्षा सेंध मानकर चल रहा है।
ओमान के साथ समझौता
तनाव के बीच एक उम्मीद की किरण भी दिख रही है। सऊदी अरब के अल-हदाथ और अल-अरबिया न्यूज चैनल की रिपोर्ट बताती है कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को अगले 60 दिनों के लिए सुरक्षित आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति बनी है। चीन की शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने भी पुष्टि की है कि इस समझौते की रूपरेखा तैयार है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मुहर लगनी अभी बाकी है।
समझौते का नया स्वरूप
प्रस्तावित समझौते के तहत जहाजों की आवाजाही के लिए एक नई नियमावली तय की गई है:
- प्रवेश करने वाले जहाज: ये जहाज ईरान के समुद्री तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल करेंगे।
- बाहर निकलने वाले जहाज: ये ओमान की सीमा के नजदीक वाले रास्ते से गुजरेंगे।
- शुल्क नीति: इस समझौते के तहत किसी भी जहाज से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
भविष्य और शांति वार्ता
मौजूदा हालात बताते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच बैक-चैनल यानी मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, जो अब अपने आखिरी मोड़ पर है। हालांकि, धरातल पर स्थिति बेहद अस्थिर है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों के विपरीत, जमीन पर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। तेहरान में बढ़ाई गई आंतरिक सुरक्षा और गश्त इस बात का सबूत है कि ईरान कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या कूटनीति की जीत होती है या फिर होर्मुज का यह जलमार्ग और अधिक खूनी संघर्ष का गवाह बनेगा।







