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केदारनाथ धाम के कपाट खुले, पीएम के नाम पहली पूजा

देहरादून,अंग भारत। आस्था और विश्वास के केंद्र बाबा केदारनाथ धाम के कपाट आज पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहली पूजा-अर्चना की।

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सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
कपाट खुलते ही केदारनाथ धाम में भक्ति का माहौल चरम पर पहुंच गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इसी के साथ राज्य की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा का भी विधिवत शुभारंभ हो गया। प्रशासन ने इस बार बड़ी संख्या में यात्रियों को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं को दुरुस्त किया है।

सीएम बोले—पीएम की केदारनाथ में विशेष आस्था
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री की केदारनाथ धाम के प्रति गहरी आस्था है। यही कारण है कि उनके मार्गदर्शन में चारधाम यात्रा और उससे जुड़े विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

भक्ति में डूबा धाम, गूंजे डमरू और बैंड
धाम में आठवीं सिखलाई रेजीमेंट के बैंड की मधुर धुनों और डमरू वादन ने माहौल को शिवमय बना दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मंदिर समिति और प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे और कपाट खुलने के साक्षी बने।

पौराणिक मान्यता और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ धाम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है और इसे पंच केदार में प्रथम केदार माना जाता है। हर वर्ष ग्रीष्मकाल में लगभग छह महीनों के लिए कपाट खोले जाते हैं, जबकि शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में पांडव अपने पापों के प्रायश्चित के लिए यहां पहुंचे थे, जहां भगवान शिव ने उन्हें महिष रूप में दर्शन दिए। उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग की स्थापना मानी जाती है। मंदिर के गर्भगृह में स्थित त्रिकोणीय शिवलिंग को अत्यंत प्राचीन और दिव्य माना जाता है।

भुकुंट भैरव के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है
केदारनाथ यात्रा में भुकुंट भैरव का भी विशेष महत्व है। उन्हें केदारपुरी का रक्षक देवता माना जाता है। मान्यता है कि सर्दियों में जब धाम के कपाट बंद रहते हैं, तब भी भैरव बाबा क्षेत्र की रक्षा करते हैं। श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन के साथ भैरव मंदिर में पूजा करना भी जरूरी मानते हैं, तभी यात्रा पूर्ण मानी जाती है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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