कोलकाता,अंग भारत। कोलकाता पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक-अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है, जिसके तहत शहर के सभी पुलिस डिवीजनों में अब ‘डिविजनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो’ (डीसीआरबी) का गठन किया जाएगा। कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने मंगलवार को इस योजना से जुड़ा आधिकारिक निर्देश जारी किया, जिसका उद्देश्य इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के अंतर्गत विभागीय संचार व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और तेज बनाना है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से थानों और पुलिस मुख्यालय के बीच अपराधियों के डेटा का मिलान तथा मामलों की जांच से जुड़े दस्तावेजों का आदान-प्रदान सेकंडों में संभव हो सकेगा।
आईसीजेएस का ढांचा
इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम यानी आईसीजेएस देश की न्यायिक और पुलिस व्यवस्था को एक साझा मंच पर लाने की एक राष्ट्रीय परियोजना है। इस प्रणाली के जरिए पुलिस विभाग, कानून की अदालतें, सरकारी वकील (अभियोजन), फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (एफएसएल), स्वास्थ्य संस्थान और सुधार गृह (जेल) आपस में सीधे जुड़ते हैं। कोलकाता पुलिस के प्रत्येक डिवीजन में डीसीआरबी की स्थापना इसी बड़े नेटवर्क को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए की जा रही है। जब कोई अपराध होता है, तो पुलिस उसकी जांच करती है और चार्जशीट तैयार करती है। पहले इन फाइलों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक भेजने में काफी समय नष्ट होता था। कभी-कभी कागजी दस्तावेजों के खोने या उनके फटने का डर भी बना रहता था। डीसीआरबी इस कागजी कार्रवाई को पूरी तरह डिजिटल प्रारूप में बदल देगा, जिससे सभी संबंधित विभागों को एक ही क्लिक पर वास्तविक समय में सटीक जानकारी मिल सकेगी।
“अपराधियों पर नकेल कसने और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का समय पर उपयोग पुलिस की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।”
डीसीआरबी का कार्यबल
कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद के निर्देशानुसार, प्रत्येक डिविजनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो को सुचारू रूप से चलाने के लिए विशेष पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। प्रत्येक यूनिट में कुल आठ पुलिसकर्मी अपनी सेवाएं देंगे, जिनमें ये पद शामिल किए गए हैं:
- उपनिरीक्षक (एसआई): यह अधिकारी डीसीआरबी की पूरी टीम का नेतृत्व करेगा और फाइलों के डिजिटल सत्यापन के लिए जिम्मेदार होगा।
- सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई): इनका काम विभिन्न थानों से आने वाले डेटा का वर्गीकरण और प्रविष्टि सुनिश्चित करना होगा।
- कांस्टेबल: यह स्टाफ डेटा एंट्री, तकनीकी सहायता और पुलिस मुख्यालय के साथ दैनिक संचार को बनाए रखने में सहयोग करेगा।
यह आठ सदस्यीय टीम अपने-अपने डिवीजन के थानों से अपराधियों का इतिहास, उनके फिंगरप्रिंट, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की स्थिति और न्यायालय के फैसलों का पूरा ब्योरा डिजिटल फाइल के रूप में तैयार करेगी। इस डेटा को बाद में राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी) और जरूरत पड़ने पर कोलकाता पुलिस मुख्यालय को भेजा जाएगा।
डिजिटल डेटा का लाभ
इस नई व्यवस्था से जांच अधिकारियों को अपराधियों के पुराने रिकॉर्ड खंगालने में बहुत कम समय लगेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी अपराधी ने कोलकाता के एक हिस्से में कोई अपराध किया और वह दूसरे डिवीजन में पकड़ा जाता है, तो डीसीआरबी के साझा डेटाबेस की मदद से उसकी पहचान तुरंत उजागर हो जाएगी।
नीचे दी गई तालिका के माध्यम से पुरानी और नई डिजिटल व्यवस्था के अंतर को समझा जा सकता है:
| पुरानी व्यवस्था | नई डीसीआरबी व्यवस्था |
|---|---|
| फाइलों को भौतिक रूप से थानों से मुख्यालय भेजा जाता था। | सभी दस्तावेज क्लाउड-आधारित डिजिटल डेटाबेस पर सुरक्षित रहेंगे। |
| फोरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट आने में देरी होती थी। | आईसीजेएस पोर्टल से सीधे डिजिटल रिपोर्ट साझा की जा सकेगी। |
| अपराधी के पुराने रिकॉर्ड की तलाश में कई दिनों का समय लगता था। | एक क्लिक पर अपराधी का पूरा आपराधिक इतिहास सामने आ जाएगा। |
इस प्रकार, पुलिस की तकनीकी विंग सीधे थानों की जांच टीमों को मदद पहुंचाएगी। त्वरित डेटा मिलने से अदालतों में भी मुकदमों की सुनवाई तेजी से पूरी हो सकेगी, जिससे आम जनता को न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा। पहले गवाहों के समन और वारंट तामीली की प्रक्रिया में भी काफी समय बर्बाद होता था, लेकिन इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से थानों और अदालतों के बीच फाइलों का डिजिटल मूवमेंट होने से समन तामीली की दर में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
सुरक्षा और गोपनीयता
डिजिटल डेटा के बढ़ने के साथ ही उसकी सुरक्षा की चिंताएं भी सामने आती हैं। डीसीआरबी के तहत रखे जाने वाले सभी डेटा को सुरक्षित सर्वर पर होस्ट किया जाएगा ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति इसे एक्सेस न कर सके। केवल अधिकृत पुलिस अधिकारियों के पास ही लॉगइन क्रेडेंशियल होंगे। कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि सूचनाओं की सटीकता और उनकी गोपनीयता बनाए रखना पुलिस बल की प्राथमिकता होगी। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो लगातार इन डीसीआरबी इकाइयों की निगरानी करेगा ताकि डेटा प्रोसेसिंग में किसी प्रकार की तकनीकी खामी या मानवीय त्रुटि न हो। यह कदम कोलकाता पुलिस को देश के सबसे आधुनिक और संवेदनशील पुलिस बलों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाकर पुलिसिंग के अन्य क्षेत्रों को भी इससे लिंक किया जा सकता है।







