चंडीगढ़,अंग भारत| पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ छापेमारी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। पिछले एक महीने में यह तीसरी बार है जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने उनके चंडीगढ़ और दिल्ली स्थित परिसरों पर दबिश दी है। इस बार की कार्रवाई ने केवल कानूनी जांच को ही नहीं, बल्कि पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच के टकराव को भी नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। एजेंसी मुख्य रूप से 100 करोड़ रुपये से अधिक की कथित मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है, जो हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड जैसी कंपनियों से सीधे तौर पर जुड़े हैं।
छापेमारी और सुरक्षा का घेरा
शनिवार की सुबह जब ईडी की टीमें संजीव अरोड़ा के आधिकारिक आवास और दफ्तर पहुंचीं, तो वहां का नजारा बिल्कुल अलग था। करीब आठ गाड़ियों में आए अधिकारियों ने पूरे इलाके को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया था। स्थानीय पुलिस के बजाय केंद्रीय सुरक्षाबलों की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया था कि यह सामान्य जांच नहीं है। घंटों तक चले इस सर्च ऑपरेशन में न केवल फिजिकल फाइल्स को खंगाला गया, बल्कि लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों से भी डेटा रिट्रीव किया गया। 17 अप्रैल को हुई पिछली छापेमारी के बाद यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जो बताती है कि जांच एजेंसियां अब एक ठोस सबूत जुटाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
खरड़ का लिंक और संदिग्ध एजेंट
ईडी की इस कार्रवाई की जड़ें मोहाली के खरड़ तक जाती हैं। हाल ही में ईडी ने वेस्टर्न टावर्स में रहने वाले एक कथित लायजन एजेंट नितिन गोहल के घर पर रेड मारी थी। सूत्रों की मानें तो गोहल से मिले दस्तावेजों ने जांच का रास्ता साफ कर दिया है। एजेंसी को शक है कि ये तमाम वित्तीय अनियमितताएं एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं, जिसमें कई फर्जी कंपनियां कागजों पर बनाई गईं। संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, वे कथित तौर पर इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का काम कर रहे हैं।
100 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग
जांच का मुख्य आधार ‘राउंड ट्रिपिंग’ और फर्जी निर्यात का मॉडल है। ईडी का दावा है कि इस पूरे घोटाले की रूपरेखा कुछ इस तरह तैयार की गई थी:
- मोबाइल फोन की फर्जी खरीद दिखाकर कागजों पर बड़े पैमाने पर व्यापार दिखाया गया।
- इन फोन्स का निर्यात दिखाकर दुबई से भारत में अवैध धन मंगाया गया।
- फर्जी कंपनियों के नाम पर जीएसटी बिल जनरेट किए गए ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा लिया जा सके।
- ड्यूटी ड्रॉबैक और जीएसटी रिफंड के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया।
राजनीतिक घमासान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उनका तर्क है कि एक साल में तीन बार छापेमारी के बावजूद एजेंसी के हाथ अभी तक खाली हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि केंद्र सरकार पंजाब की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है।
आम आदमी पार्टी का रुख
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी मोर्चा खोल दिया है। उनके अनुसार, यह सिर्फ जांच नहीं बल्कि पंजाब में हो रहे विकास कार्यों को रोकने की एक कोशिश है। आप का कहना है कि जहां-जहां बीजेपी को हार का डर होता है, वहां-वहां वे केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल एक हथियार की तरह करते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ईडी के अधिकारी डिजिटल डेटा की गहन फॉरेंसिक ऑडिट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या वाकई संजीव अरोड़ा इस पूरी चेन के मास्टरमाइंड हैं या फिर वे सिर्फ एक राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यदि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप साबित होते हैं, तो यह पंजाब की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि यह न केवल पार्टी की छवि को प्रभावित करेगा बल्कि आने वाले समय में कानूनी लड़ाई भी लंबी खिंच सकती है। जनता की नजरें अब अदालत और ईडी की चार्जशीट पर टिकी हैं, जो इस मामले की सच्चाई को सबके सामने लाएगी।








