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राघोपुर में चार दिनों के भीषण तांडव के बाद थमा गंगा का कटाव, लेकिन नई जगह बांध पर मंडराया खतरा

भागलपुर,अंग भारत। जिले के इस्माईलपुर-बिहपुर तटबंध के तहत आने वाले राघोपुर गांव में पिछले चार दिनों से गंगा का कहर जारी था। लगातार हो रहे भीषण कटाव से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ था। आखिरकार अब मुख्य स्थल पर गंगा का कटाव थम गया है। हालांकि, कटाव रुकने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन उनकी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गंगा ने अब अपनी धारा दूसरी ओर मोड़ते हुए जमींदारी बांध की तरफ कटाव शुरू कर दिया है।

100 साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर गंगा में समाया

लगातार कटाव के कारण राघोपुर का करीब 100 वर्ष पुराना ऐतिहासिक चैती दुर्गा मंदिर गंगा में समा गया। मंदिर के नदी में समाने के बाद उस जगह पर कटाव की रफ्तार कुछ कम हुई है। ग्रामीणों के लिए यह घटना बेहद भावुक करने वाली रही। वर्षों से गांव की पहचान से जुड़ा यह मंदिर देखते ही देखते गंगा की तेज धारा में विलीन हो गया।ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के चले जाने के बाद कटाव का मुख्य दबाव फिलहाल कम हुआ है, लेकिन नदी की बदलती धारा को देखते हुए खतरा अभी टला नहीं है। उन्हें डर है कि पानी का बहाव किसी दूसरी दिशा में बढ़ा तो आसपास के घरों और बांध को नुकसान हो सकता है।

नई जगह जमींदारी बांध की ओर बढ़ रहा कटाव

मुख्य कटाव रुकने के बाद अब गंगा ने जमींदारी बांध की तरफ रुख कर लिया है। इस बांध को राघोपुर और आसपास के इलाकों के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी ने बांध को कमजोर कर दिया तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।राघोपुर को बचाने में ब्रिटिश काल की पुरानी रेलवे लाइन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समय के साथ यह पुरानी रेल लाइन अब बांध का रूप ले चुकी है और फिलहाल गांव के लिए सुरक्षा दीवार बनी हुई है। लेकिन गंगा की नई धाराएं अब इसके निचले हिस्से को काटने लगी हैं। इसी वजह से ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ गई है।

पानी घटने पर बढ़ सकता है दबाव

स्थानीय जानकारों का कहना है कि गंगा का जलस्तर जब घटना शुरू करेगा, तब तटबंधों और आसपास के इलाकों पर दबाव और बढ़ सकता है। पानी घटने के दौरान नदी की धाराओं में बदलाव आता है और कई जगहों पर कटाव तेज हो जाता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नई जगह पर तत्काल फ्लड फाइटिंग का काम शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि केवल मौजूदा कटाव को रोकना पर्याप्त नहीं है। जमींदारी बांध और पुरानी रेलवे लाइन को बचाने के लिए भी अभी से मजबूत इंतजाम करने की जरूरत है।

रात-दिन चल रहा कटावरोधी काम

जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों और प्रशासन की टीम ने प्रभावित इलाके में रात-दिन काम कर कटाव को रोकने की कोशिश की। अधिकारियों और मजदूरों की लगातार मेहनत के बाद प्रभावित स्थल पर ‘ऐज’ का काम पूरा कर लिया गया है। इसके बाद मुख्य आबादी की ओर बढ़ रहा कटाव फिलहाल रुक गया है।अब प्रशासन का ध्यान उन नए स्थानों पर है, जहां गंगा की धारा बांध की ओर बढ़ रही है। ग्रामीणों ने यहां भी बोल्डर क्रेटिंग और जियो बैग लगाने की मांग की है, ताकि नदी की धार को बांध तक पहुंचने से रोका जा सके।

कई जिलों से पहुंच रही मदद

कटावरोधी काम में आसपास के जिलों से भी मदद पहुंच रही है। खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार और गोपालपुर समेत कई इलाकों से सैकड़ों युवा और ट्रैक्टर जियो बैग और बोल्डर लेकर राघोपुर पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोग भी प्रशासन के साथ मिलकर बचाव कार्य में हाथ बंटा रहे हैं।प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। ड्रोन कैमरों के जरिए गंगा की धारा और कटाव की स्थिति की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव होने पर तुरंत जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह

जिला प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था भी तैयार रखी गई है।फिलहाल राघोपुर में मुख्य कटाव रुकने से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन जमींदारी बांध की ओर बढ़ता कटाव नई चिंता बन गया है। ग्रामीणों की मांग है कि खतरा बढ़ने का इंतजार किए बिना तत्काल फ्लड फाइटिंग और बोल्डर क्रेटिंग का काम कराया जाए, ताकि गंगा की बदलती धारा से गांव और आसपास की आबादी को सुरक्षित रखा जा सके।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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