जयपुर,अंग भारत। राजस्थान में मानसून का मिजाज लगातार बदल रहा है और मौसम विभाग ने प्रदेश के 24 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसमें जालोर, पाली और सिरोही जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर आप राजस्थान में रहते हैं या अगले कुछ दिनों में यहां की यात्रा करने वाले हैं, तो यह जानना आपके लिए बहुत जरूरी है कि 3 अगस्त से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 अगस्त से राज्य में मानसून कमजोर पड़ने लगेगा, जिससे ज्यादातर हिस्सों में आसमान साफ हो जाएगा और केवल कुछ ही जगहों पर हल्की बारिश देखने को मिलेगी। यानी भारी बारिश का दौर अब थमता हुआ नजर आ रहा है।
कहां कितनी बारिश हुई?
पिछले 24 घंटों में राजस्थान के कई जिलों में बादलों ने जमकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कुछ जगहों पर तो पानी इतना बरसा कि सड़कें नदियां बन गईं। सबसे ज्यादा बारिश बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ में दर्ज की गई, जहां कुल 60 मिलीमीटर पानी गिरा। वहीं, उदयपुर संभाग के सलूंबर में भी अच्छी-खासी बारिश हुई और वहां 57 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। आइए नीचे दी गई तालिका से समझते हैं कि प्रदेश के किस हिस्से में कितनी बारिश दर्ज की गई है:
| जिला/क्षेत्र | बारिश की स्थिति (मिलीमीटर/इंच में) |
|---|---|
| कुशलगढ़ (बांसवाड़ा) | 60 मिलीमीटर (सबसे अधिक) |
| सलूंबर (उदयपुर संभाग) | 57 मिलीमीटर |
| अजमेर, बारां, पाली, नागौर, जालोर, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, राजसमंद, माउंट आबू | लगभग 1 इंच तक बारिश |
| अलवर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, टोंक, डूंगरपुर, भरतपुर, बूंदी, भीलवाड़ा | हल्की से मध्यम बारिश |
इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में मानसून ने अच्छी खासी रफ्तार पकड़ी है। हालांकि, बीकानेर, जयपुर और भरतपुर जैसे संभागों में हल्की बारिश का यह दौर अभी रविवार को भी जारी रहने की उम्मीद है, जबकि कोटा, अजमेर, उदयपुर और जोधपुर संभाग के ज्यादातर इलाकों में अब मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगा है।
ट्रफ लाइन खिसकने का असर
आखिरकार अचानक मानसून क्यों कमजोर पड़ रहा है? इसका सीधा जवाब मौसम वैज्ञानिकों के पास है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 3 और 4 अगस्त से मानसून की ट्रफ लाइन उत्तर भारत की तरफ खिसकना शुरू हो जाएगी। जब यह ट्रफ लाइन उत्तर की तरफ बढ़ेगी, तो राजस्थान के आसमान से मानसूनी बादल छंटने लगेंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि राजस्थान में तो बारिश की गतिविधियां बहुत कम हो जाएंगी, लेकिन उत्तर भारत के अन्य राज्यों, जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश का दौर तेज हो जाएगा। राजस्थान के लोगों को फिलहाल भारी बारिश से राहत मिलेगी, लेकिन उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
तापमान और उमस का खेल
बारिश के इस दौर ने राजस्थान के तपते रेगिस्तान को थोड़ी ठंडक जरूर दी है। पश्चिमी राजस्थान में हुई अच्छी बारिश के कारण जैसलमेर और बाड़मेर जैसे गर्म जिलों में अधिकतम तापमान में सीधे 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राहत की बात यह है कि पूरे प्रदेश में किसी भी शहर का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार नहीं गया। शनिवार को फलोदी शहर सबसे गर्म रहा, जहां का अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लेकिन यहां एक पेंच है। तापमान भले ही गिर गया हो, पर हवा में नमी की मात्रा यानी उमस बहुत बढ़ गई है। जब हवा में उमस बढ़ती है, तो पसीना नहीं सूखता और गर्मी ज्यादा परेशान करती है। आने वाले दिनों में जब धूप खिलेगी, तो यह उमस लोगों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है।
आगे क्या करना चाहिए?
मौसम के इस बदलाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग ने कुछ जरूरी सलाह जारी की है। जिन 24 जिलों में अलर्ट है, वहां के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
- जलभराव से बचें: विशेष रूप से जालोर, पाली और सिरोही के निवासियों को जलभराव वाले क्षेत्रों और बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
- यात्रा में सावधानी: अचानक तेज बारिश होने पर नदी-नालों में उफान आ सकता है, इसलिए पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से बचें।
- किसानों के लिए सलाह: जिन इलाकों में फसल को पानी की जरूरत थी, वहां इस बारिश से फायदा हुआ है। लेकिन जहां 3 अगस्त से मौसम साफ होने वाला है, वहां किसान अपनी फसलों की निराई-गुड़ाई और कीटनाशकों के छिड़काव का काम आसानी से निपटा सकते हैं।
“मौसम में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, लेकिन पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को इस दौरान स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचा जा सके।”







