सीवान,अंग भारत। बिहार के सीवान जिले में हाल ही में हुए चर्चित गोलीकांड के मुख्य आरोपी को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया है। यह वारदात 29 अप्रैल 2026 को नगर थाना क्षेत्र के आंदर ढाला के पास अंजाम दी गई थी, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया था। पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने इलाके में फैले दहशत के माहौल को शांत करने का प्रयास किया है, हालांकि घटना के बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है।
मुठभेड़ की पूरी कहानी
पुलिस को एक बेहद गोपनीय सूचना मिली थी कि इस हत्याकांड का मुख्य शूटर सोनू कुमार यादव किसी दूसरी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा है। वह बड़हरिया थाना क्षेत्र के लकड़ी इलाके से होकर गुजरने वाला था। जैसे ही पुलिस की टीम ने उस क्षेत्र की घेराबंदी की, आरोपी ने खुद को घिरता देख पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें 25 हजार रुपये का इनामी अपराधी सोनू यादव गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत उपचार के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सोनू यादव हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सरेया गांव का रहने वाला था और गरजू यादव का पुत्र था।
गोलीकांड का घटनाक्रम
29 अप्रैल 2026 की उस मनहूस तारीख को शहर में हुई गोलीबारी ने कानून-व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस हमले में दो प्रमुख पीड़ित थे:
- हर्ष कुमार: जिन्हें अपराधियों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था।
- चंदन सिंह: ये भाजपा नेता मनोज सिंह के बहनोई हैं और इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका अभी भी उपचार चल रहा है।
घटना के बाद से ही सीवान पुलिस पूरी तरह सतर्क थी। एसपी पुरन कुमार झा के सख्त निर्देश के बाद एसडीपीओ अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसका एकमात्र लक्ष्य दोषियों को कानून के शिकंजे में लाना था।
गिरफ्तारी और कार्रवाई
पुलिस की जांच केवल सोनू यादव तक ही सीमित नहीं है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक की गई कार्रवाई के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- छोटू यादव की गिरफ्तारी: मुख्य शूटर के सहयोगी छोटू यादव को भी पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान ही दबोच लिया था। फिलहाल उसका इलाज पटना के पीएमसीएच (PMCH) में चल रहा है।
- वाहन की बरामदगी: घटना में इस्तेमाल की गई संदिग्ध गाड़ी के साथ सुनील यादव को पकड़ा गया है, जिससे पूछताछ जारी है।
- लगातार छापेमारी: पुलिस के अनुसार, इस पूरे गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
शहर के बीचों-बीच आंदर ढाला जैसे व्यस्त इलाके में हुई इस फायरिंग ने प्रशासन की कार्यशैली को चर्चा में ला दिया है। अपराधी दिनदहाड़े फायरिंग करने और उसके बाद फरार होने में कामयाब कैसे हुए, यह मुद्दा स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वे किसी भी अपराधी को बख्शने के मूड में नहीं हैं।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अब उन कनेक्शनों को भी खंगाल रही है जिनके माध्यम से शूटरों तक हथियार पहुंचे थे। भले ही मुख्य शूटर अब कानून की पहुंच से बाहर हो चुका है, लेकिन जनता अभी भी इस पूरे हत्याकांड की असली साजिश और मकसद का खुलासा होने का इंतजार कर रही है। आने वाले दिनों में पुलिस प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान की उम्मीद है, जो इस गोलीकांड के कई अनसुलझे पहलुओं पर रोशनी डालेगा।







