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अरुणाचलम महोत्सव में चमके फिल्ममेकर औशिम खेतरपाल

तिरुवन्नामलई,अंग भारत। तमिलनाडु के पवित्र अरुणाचलम में आयोजित 17वें वार्षिक आध्यात्मिक महोत्सव के दौरान अभिनेता और फिल्म निर्माता औशिम खेतरपाल को ‘आध्यात्मिक नेतृत्व सम्मान’ से सम्मानित किया गया। धार्मिक और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों तथा समाज सेवा में उनके योगदान को देखते हुए संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने उन्हें यह विशेष सम्मान प्रदान किया।इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से आए संतों, साधुओं और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी साई रविचंद्रन के मार्गदर्शन में अक्षय श्री साई ध्यान सभा मंदिर द्वारा किया गया।

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‘शांति और एकता’ की मशाल का विशेष महत्व
महोत्सव के दौरान ‘साई बाबा शांति पुरस्कार’ के अंतर्गत ‘पीस एंड यूनिटी’ की मशाल को प्रज्ज्वलित किया गया। इस मशाल की यात्रा वेटिकन सिटी से शुरू होकर दक्षिण अफ्रीका और डैलस होते हुए भारत पहुंची। अरुणाचलम में 100 से अधिक साधु-संतों की उपस्थिति में औशिम खेतरपाल ने इस मशाल को प्रज्ज्वलित किया, जो वैश्विक शांति और एकता के संदेश का प्रतीक बना।यह क्षण पूरे आयोजन का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा, जहां आध्यात्मिकता और मानवता के मूल्यों को एक साथ प्रदर्शित किया गया।

धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं की भागीदारी
महोत्सव के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने गिरिवलम परिक्रमा में भाग लिया। इसके साथ ही हवन, अभिषेक, आरती, भजन और अन्नदान जैसे धार्मिक एवं सेवा कार्य भी संपन्न किए गए। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से ‘सबका मालिक एक’ के संदेश को मजबूती से प्रस्तुत किया गया।श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इन आयोजनों में हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया।

औशिम खेतरपाल का संदेश
इस अवसर पर औशिम खेतरपाल ने कहा कि आज के दौर में दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरत शांति और एकता की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि कला और सिनेमा के माध्यम से भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है, और वे इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

नई फिल्म भी चर्चा में
महोत्सव के दौरान उनकी आगामी फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ की भी चर्चा रही, जो 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। यह फिल्म लैंगिक विविधता, मानवाधिकार और आत्म-स्वीकृति जैसे संवेदनशील विषयों को सामने लाती है।आयोजकों के अनुसार, यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि समाज में एकता, सेवा और मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुआ।इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आध्यात्मिकता और सामाजिक जागरूकता साथ मिलकर एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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