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ज्योति ने पूरे किए 100 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले, हॉकी इंडिया ने दी बधाई

ऑकलैंड,अंग भारत। भारतीय महिला हॉकी टीम की धाकड़ मिडफील्डर ज्योति ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अपना 100वां मैच खेलकर एक शानदार उपलब्धि अपने नाम कर ली है। यह विशेष मील का पत्थर उन्होंने एफआईएच महिला हॉकी नेशंस कप 2026 के दौरान जापान के खिलाफ मैदान पर कदम रखते ही हासिल किया। खेल के प्रति उनकी निरंतरता और मिडफील्ड में उनकी सजगता ने उन्हें टीम की रीढ़ बना दिया है। हॉकी इंडिया ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें विशेष बधाई दी है, जो उनके सात वर्षों के कठिन परिश्रम का सम्मान है।

2019 में शानदार शुरुआत

हरियाणा की मिट्टी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचने का ज्योति का सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने साल 2019 में मलेशिया के खिलाफ द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज से अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। तब से लेकर आज तक, उन्होंने न केवल अपनी फिटनेस को उच्चतम स्तर पर बनाए रखा है, बल्कि खेल की समझ में भी जबरदस्त सुधार किया है। शुरुआत से ही वे अपनी सटीक पासिंग और गेंद को नियंत्रित करने की कला के लिए पहचानी जाती रही हैं। कोचों का उन पर भरोसा हमेशा अटूट रहा है, जिसका नतीजा आज उनके 100 अंतरराष्ट्रीय मैचों के रूप में सबके सामने है।

प्रमुख टूर्नामेंटों में योगदान

ज्योति का करियर कई यादगार पलों से भरा हुआ है। उन्होंने उन तमाम बड़ी जीतों में अपना पसीना बहाया है जिसने भारतीय महिला हॉकी की तस्वीर बदली है। उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022: कांस्य पदक जीतने वाली ऐतिहासिक टीम का हिस्सा रहीं।
  • महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी: स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में उनका प्रदर्शन निर्णायक रहा।
  • एफआईएच प्रो लीग: अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस लीग में उन्होंने दुनिया की दिग्गज टीमों के खिलाफ खुद को साबित किया।
  • एशिया कप: महाद्वीपीय स्तर पर भारत की दावेदारी को मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

टीम का संतुलन बनाए रखना

मिडफील्डर के रूप में ज्योति की भूमिका केवल गोल करना नहीं, बल्कि खेल का प्रवाह बनाना है। वह रक्षापंक्ति और फॉरवर्ड लाइन के बीच एक पुल का काम करती हैं। जब खेल दबाव में होता है, तो उनकी शांत मानसिकता टीम को बिखरने से बचाती है। उनकी फील्ड पोजिशनिंग इतनी सटीक होती है कि विरोधी टीमें उनके क्षेत्र से गेंद को पार कराने में संघर्ष करती हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम की मिडफील्ड संरचना में वे एक अपरिहार्य नाम बन गई हैं।

खिलाड़ी के व्यक्तिगत विचार

अपने 100वें मैच के बाद ज्योति काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि भारतीय जर्सी पहनना एक खिलाड़ी के लिए केवल काम नहीं, बल्कि देश के प्रति समर्पण की भावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सफर में उनके माता-पिता, गुरुओं और साथ खेलने वाली सहेलियों का योगदान सबसे ज्यादा रहा है। ज्योति मानती हैं कि हॉकी ने उन्हें अनुशासन और हार न मानने का जज्बा सिखाया है। वे कहती हैं, “हर बार जब मैं तिरंगे वाली जर्सी पहनती हूं, तो एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव होता है। यह 100 मैचों का सफर मेरे लिए सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादें हैं।”

अधिकारियों की मिली सराहना

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और दिग्गज खिलाड़ी रहे दिलीप तिर्की ने ज्योति के समर्पण की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि एक मिडफील्डर के रूप में इतनी निरंतरता बनाए रखना आसान नहीं होता, और ज्योति ने अपनी फिटनेस और खेल के प्रति निष्ठा से इसे मुमकिन कर दिखाया है। वहीं, महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा कि ज्योति का यह सफर उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए एक ब्लूप्रिंट की तरह है जो भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनने का सपना देखते हैं। उनकी सादगी और मेहनत ही उन्हें प्रशंसकों का चहेता बनाती है।

भविष्य के बड़े लक्ष्य

100 मैचों का अनुभव प्राप्त करने के बाद, ज्योति अब अपने खेल के अगले चरण में हैं। आने वाले समय में विश्व कप और ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंटों में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। टीम को अब उनसे और भी अधिक परिपक्व प्रदर्शन की उम्मीद है। वे न केवल एक खिलाड़ी हैं, बल्कि नई खिलाड़ियों के लिए एक मेंटर की तरह भी काम कर रही हैं। प्रशंसकों का मानना है कि ज्योति अभी अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं और वे भारतीय महिला हॉकी को और भी ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम हैं। उनका अगला लक्ष्य टीम को वैश्विक रैंकिंग में और ऊपर ले जाना और बड़े टूर्नामेंटों में स्वर्ण पदक सुनिश्चित करना है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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