भागलपुर,अंग भारत। तीन सूत्री मांगों को लेकर भागलपुर नगर निगम के कर्मचारी गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। बिहार लोकल बॉडीज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल के कारण पूरे शहर की प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो गई है और आम जनता को पानी, सफाई और दफ्तर के कामों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी अपनी मांगों को मनवाने के लिए अड़े हुए हैं और नगर निगम परिसर के भीतर ही धरने पर बैठ गए हैं, जिससे सामान्य जनजीवन और नागरिक सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। नगर निगम दफ्तर आने वाले लोगों को बिना काम कराए निराश होकर लौटना पड़ रहा है और पूरे निगम क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है।
हड़ताल क्यों हुई?
नगर निगम के कर्मचारियों का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। इसके पीछे लंबे समय से चली आ रही अनदेखी है। बिहार लोकल बॉडीज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस बार आर-पार की लड़ाई का मन बनाया है। कर्मचारियों की तीन सूत्री मांगों में मुख्य रूप से उनके हक, वेतन विसंगतियों को दूर करने और सेवा शर्तों में सुधार से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों ने उनकी मांगों को हमेशा हल्के में लिया और हर बार केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाई गई। इस बार जब तक कोई लिखित और ठोस सरकारी आदेश नहीं आता, तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटेगा।
“हम सालों से अपनी बुनियादी मांगों के लिए गुहार लगा रहे हैं। जब हमारी बात सुनने वाला कोई नहीं है, तो हमें मजबूरन यह रास्ता चुनना पड़ा। यह लड़ाई हमारे अस्तित्व की है।” – प्रदर्शनकारी कर्मचारी
जनता पर असर
गुरुवार की सुबह जैसे ही दफ्तर खुले, निगम कार्यालय का नजारा बदला हुआ था। बाबू अपनी कुर्सियों पर नहीं थे और मुख्य द्वारों पर ताले लटके हुए थे। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, नक्शा पास कराने, होल्डिंग टैक्स जमा करने और पेंशन संबंधी कामों के लिए आए बुजुर्गों और आम नागरिकों को बैरंग लौटना पड़ा। दफ्तर के बाहर लगी भीड़ में लोग अधिकारियों को कोसते नजर आए। इसके अलावा, हड़ताल का सीधा असर शहर की बुनियादी सेवाओं पर पड़ा है, जिसे नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| नागरिक सेवा | हड़ताल का प्रभाव | वर्तमान स्थिति और विकल्प |
|---|---|---|
| पीने का पानी | बोरिंग पंप बंद होने से कई वार्डों में जलापूर्ति ठप | बरारी वाटर वर्क्स से आंशिक सप्लाई चालू |
| सड़क और सफाई | मुख्य सड़कों पर झाड़ू नहीं लगी, कचरा फैला | अस्थायी सफाई कर्मी आंशिक रूप से कार्यरत |
| प्रशासनिक काम | सभी काउंटर और विभाग बंद | फाइलें ठप, जनता परेशान |
| विकास योजनाएं | सामान्य बोर्ड बैठक स्थगित होने से नए काम रुके | सभी नए टेंडर और प्रस्ताव अटके |
पानी की भारी किल्लत
भागलपुर के कई मोहल्लों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मच गया है। नगर निगम के अधीन चलने वाले नलकूप और बोरिंग पूरी तरह से बंद रहे क्योंकि इन्हें चलाने वाले ऑपरेटर हड़ताल पर डटे हैं। हालांकि, बरारी वाटर वर्क्स के कर्मचारियों ने सुबह के समय पानी की सप्लाई की, जिससे कुछ हद तक राहत मिली। लेकिन दोपहर और शाम की सप्लाई बाधित होने से लोगों को निजी चापाकलों और पानी के जार खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। यदि यह हड़ताल एक-दो दिन और चली, तो जल संकट गहराने की पूरी आशंका है।
सफाई व्यवस्था बेपटरी
शहर को साफ रखने का जिम्मा संभालने वाले स्थायी सफाई कर्मियों ने काम पूरी तरह बंद कर दिया है। शहर के चौक-चौराहों और मुख्य बाजारों में कूड़े के ढेर दिखने लगे हैं। हालांकि, नगर निगम के कुछ वार्डों में काम करने वाले अस्थायी और दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मियों ने अपनी ड्यूटी जारी रखी। इस वजह से शहर की व्यवस्था पूरी तरह से ठप होने से बच गई। लेकिन स्थायी कर्मियों के बिना मुख्य डंपिंग यार्डों तक कचरा पहुंचाना नामुमकिन साबित हो रहा है, जिससे दुर्गंध फैलने लगी है।
अटकीं जरूरी बैठकें
इस आंदोलन का सबसे बड़ा झटका नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे को लगा है। गुरुवार को होने वाली नगर निगम की प्रस्तावित सामान्य बोर्ड की बैठक को आनन-फानन में स्थगित करना पड़ा। इस बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगनी थी। नाली, सड़क निर्माण और कचरा प्रबंधन के लिए नए टेंडर जारी होने वाले थे। बैठक टलने से विकास कार्यों को बड़ा झटका लगा है और फाइलों में बंद योजनाएं अब अगले आदेश तक धूल फांकती रहेंगी।
संगठन का रुख
नगर निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विकास कुमार हरि ने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रशासन की हीलाहवाली के कारण आज शहर को इस संकट में धकेला गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर पहले भी कई बार ध्यान दिलाया गया था। सरकार और नगर आयुक्त को इस मुद्दे पर पहले ही संज्ञान लेना चाहिए था। विकास कुमार हरि ने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों की तीन सूत्री मांगों पर सरकार कोई सकारात्मक और ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे और अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहेंगे।







