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प्रधानमंत्री मोदी आज से दो दिवसीय असम दौरे पर,करोड़ों के विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

गुवाहाटी,अंग भारत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर आज से दो दिवसीय दौरे पर असम आ रहे हैं। अपने दौरे के दौरान वे राज्य को 36,279 करोड़ रुपये के विकास की परियोजनाओं की सौगात देंगे। प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से, उन्होंने असम का 40 से अधिक बार दौरा किया है, जो वास्तव में इस राज्य के लिए एक असाधारण और ऐतिहासिक राजनीतिक घटना है।’असम माला 3.0′ के तहत, 883 किलोमीटर सड़कों और 36 नए पुलों से जुड़ी परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी, जिन पर अनुमानित 3,217 करोड़ रुपये खर्च होंगे। खास बात यह है कि 13 मार्च को गुवाहाटी में होने वाले कार्यक्रम के दौरान, लगभग 8,841 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा या उन्हें जनता को समर्पित किया जाएगा। इन परियोजनाओं में 3,633 करोड़ रुपये की लागत वाली फरकाटिग-तिनसुकिया रेलवे दोहरीकरण परियोजना, 1,180 करोड़ रुपये की लागत वाली चापरमुख-डिब्रूगढ़ रेलवे लाइन का विद्युतीकरण और 421 करोड़ रुपये की लागत वाली रंगिया-मुरकोंगसेलेक रेलवे विद्युतीकरण परियोजना शामिल हैं।बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) में एनडीए सरकार बनने के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज कोकराझार में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस मौके पर, प्रधानमंत्री बीटीसी के लोगों को 4,574 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं समर्पित करेंगे और कई अहम पहलों का उद्घाटन करेंगे। इनमें 1,100 करोड़ रुपये की सड़क निर्माण परियोजनाएं, साथ ही तीन नई ट्रेन सेवाओं, कामाख्या-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस, नारंगी-अगरतला एक्सप्रेस और गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाना शामिल है।प्रधानमंत्री कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर तक बनने वाले रोपवे प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखेंगे, जिस पर 210 करोड़ खर्च होंगे, गुवाहाटी के बेतकुची में ‘एकता मॉल’ का उद्घाटन करेंगे और 2,320 करोड़ के निवेश से बने ‘कपिलि जलविद्युत प्रोजेक्ट’ को जनता को समर्पित करेंगे।दौरे के दूसरे दिन, 14 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी गुवाहाटी-सिलचर एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखेंगे, जिसके निर्माण पर अनुमानित 22,864 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण चुनावी वादे को पूरा करते हुए, प्रधानमंत्री 13 मार्च को गुवाहाटी में आयोजित होने वाले एक गरिमामय और ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान असम के चाय बागान श्रमिकों को भूमि का पट्टा वितरित करने की औपचारिक शुरुआत करेंगे। यह कदम सामाजिक न्याय और चाय-जनजाति समुदाय के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।