Founder – Mohan Milan

कैदियों के द्वारा बनाए गए सामानों की होगी बिक्री

पूर्णियाँ, अंगभारत। केंद्रीय कारा पूर्णिया में बंदियों के हुनर को एक नया मंच देते हुए प्रशासन ने ‘मुक्ति बाजार’ नाम से एक विशेष आउटलेट की शुरुआत की है। इस अनूठी पहल का उद्घाटन शनिवार को पूर्णिया के जिला अधिकारी (डीएम) अंशुल कुमार ने फीता काटकर किया। इस बाजार का मुख्य उद्देश्य जेल में बंद कैदियों के भीतर छुपे हुनर को तराशकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और मुख्यधारा से जोड़ना है। अब शहर के लोग भी जेल के कैदियों द्वारा शुद्ध और हस्तनिर्मित उत्पादों को बेहद किफायती दामों पर सीधे खरीद सकेंगे। इस काउंटर से होने वाली कमाई का एक हिस्सा सीधे कैदियों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे वे जेल में रहकर भी अपने परिवारों की आर्थिक मदद कर सकेंगे, जबकि दूसरा हिस्सा जेल प्रशासन के सुधार और रख-रखाव कार्यों में लगेगा।

मुक्ति बाजार में क्या-क्या मिलेगा? उत्पादों की पूरी सूची

मुक्ति बाजार में मिलने वाले सामान केवल सजावटी नहीं हैं, बल्कि ये रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले बेहद टिकाऊ और शुद्ध उत्पाद हैं। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि यहाँ मिलने वाली हर चीज की गुणवत्ता बाजार में मिलने वाले सामान्य ब्रांडेड सामानों से बेहतर या कम से कम उनके बराबर जरूर हो। बंदियों द्वारा तैयार किए गए सामानों की मांग बाजार में बढ़ रही है क्योंकि इनमें शुद्धता की पूरी गारंटी है।

मुख्य उत्पादों की सूची और उनकी खासियतें:

  • बांस और जूट के हस्तनिर्मित उत्पाद: बिहार की पारंपरिक जूट कला और बांस शिल्पकला का बेहतरीन नमूना यहाँ देखने को मिलता है। कैदियों ने आधुनिक डिजाइन के थैले, फाइल फोल्डर, टेबल मैट और घर की सजावट के सुंदर सामान तैयार किए हैं।
  • शुद्ध सत्तू और खाद्य सामग्रियां: मिलावट के इस दौर में, पूर्णिया जेल के कैदियों द्वारा तैयार किया गया सत्तू पूरी तरह से शुद्ध और पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।
  • छोटे कृषि यंत्र: स्थानीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, जेल के भीतर बने लोहे और लकड़ी के छोटे कृषि उपकरण भी यहाँ बिक्री के लिए रखे गए हैं।
  • स्वादिष्ट व्यंजन और स्नैक्स: स्टॉल पर लोगों के खाने-पीने के लिए साफ-सफाई के साथ तैयार किए गए कई प्रकार के पारंपरिक स्नैक्स और नमकीन भी उपलब्ध कराए गए हैं।

आइए एक नजर डालते हैं मुक्ति बाजार में मिलने वाले प्रमुख सामानों और उनकी अनुमानित कीमतों पर, जो आम जनता की जेब के बिल्कुल अनुकूल हैं:

उत्पाद का नाम विशेषता अनुमानित कीमत बाजार दर से तुलना
शुद्ध चना सत्तू बिना किसी मिलावट के पारंपरिक पिसाई बाजार से 10% तक सस्ता
जूट के थैले और बैग पर्यावरण के अनुकूल और मजबूत सिलाई ₹50 से ₹250 तक
बांस की टोकरियां व शो-पीस आकर्षक डिजाइन और टिकाऊ कलाकृति ₹80 से ₹500 तक
कृषि उपकरण (खुरपी, कुदाल आदि) मजबूत लोहे और लकड़ी का सही तालमेल लागत मूल्य पर उपलब्ध

कैदियों के जीवन में बदलाव: सजा से सुधार की ओर एक बड़ी यात्रा

जेल को अक्सर केवल सजा काटने की जगह माना जाता है, लेकिन असल बदलाव तब आता है जब कैदी वहां से कुछ नया सीखकर बाहर निकले। पूर्णिया जेल की यह पहल इसी सोच को सच साबित कर रही है। जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने इस मौके पर कहा कि कैदियों द्वारा बनाए गए इन उत्पादों से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर उनके सुधार और कल्याण पर खर्च होगा।

“जेल की चारदीवारी के भीतर बंद लोग भी हमारे समाज का हिस्सा हैं। जब उन्हें उनके काम का सही मूल्य मिलेगा, तो उनके भीतर अपराध बोध कम होगा और जीवन में कुछ अच्छा करने की इच्छा जागेगी। यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि सुधार का एक जरिया है।” – जिला प्रशासन, पूर्णिया

इस पूरी व्यवस्था का सबसे सुंदर पहलू यह है कि इससे कैदियों को दोतरफा फायदा मिलने वाला है:

  • आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता: कैदियों को उनके द्वारा किए गए श्रम का पारिश्रमिक मिलेगा। यह पैसा या तो उनके बैंक खातों में जमा होगा या सीधे उनके आश्रितों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे कैदियों के परिवारों को भी मदद मिलेगी।
  • मानसिक सुधार और सकारात्मक बदलाव: जब कोई बंदी दिनभर रचनात्मक काम में व्यस्त रहता है, तो उसका दिमाग गलत विचारों से दूर रहता है। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और जेल से रिहा होने के बाद उनके पास रोजगार का एक जरिया पहले से तैयार रहता है।

समाज और जेल प्रशासन के बीच की दूरी होगी कम

आमतौर पर आम जनता और जेल प्रशासन के बीच एक अजीब सी हिचकिचाहट और दूरी देखने को मिलती है। लोग जेल के नाम से ही घबराते हैं। लेकिन ‘मुक्ति बाजार’ जैसी पहल इस पुरानी सोच को बदल रही है। जब कोई आम नागरिक कैदियों द्वारा बनाए गए सामान को खरीदेगा, तो उसे यह अहसास होगा कि जेल की सलाखों के पीछे भी सुंदर कला और मेहनत सांस ले रही है।

बिहार में तिहाड़ जेल के ‘टीजे ब्रांड’ की तर्ज पर यह शुरुआत की गई है। आने वाले समय में पूर्णिया के इस मुक्ति बाजार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी योजना बनाई जा रही है, जिससे इन सामानों की पहुंच देश के कोने-कोने तक हो सके। जेल प्रशासन का लक्ष्य है कि बिहार के अन्य कारागारों की तुलना में पूर्णिया जेल के उत्पाद अपनी गुणवत्ता और बिक्री के मामले में सबसे आगे रहें।

आप इस बदलाव का हिस्सा कैसे बन सकते हैं?

इस मुक्ति बाजार की सफलता पूरी तरह से पूर्णिया और आसपास के जिलों के आम लोगों के सहयोग पर निर्भर करती है। जब आप यहाँ से कोई सामान खरीदते हैं, तो आप केवल एक उत्पाद नहीं खरीद रहे होते, बल्कि आप एक इंसान को सुधरने और नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का हौसला दे रहे होते हैं। तो अगली बार जब आपको शुद्ध सत्तू, जूट का थैला या घर की सजावट का कोई सामान लेना हो, तो मुक्ति बाजार जरूर जाएं। आपकी एक छोटी सी खरीद किसी के जीवन का अंधेरा दूर कर सकती है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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