फुल्लीडुमर/बांका/अंगभारत। प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आयोजित विशेष जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के प्रति सचेत करना और समय पर उनकी जांच कराना है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. संजीव कुमार सिंह और सदर अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. प्रियंका गुप्ता की अगुवाई में शुरू हुए इस अभियान का सीधा मकसद महिलाओं में बढ़ रहे कैंसर के मामलों को शुरुआती स्टेज पर ही पकड़कर उनका इलाज करना है। भारत में महिलाओं की मौत का एक बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है, जिसे केवल समय पर नियमित जांच (स्क्रीनिंग) के जरिए आसानी से रोका जा सकता है। इसी सोच के साथ फुल्लीडुमर में अब पंचायत स्तर पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोई भी महिला इस घातक बीमारी की चपेट में आने से बच सके।
कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत
ग्रामीण इलाकों में अक्सर जागरूकता की कमी या झिझक के कारण महिलाएं बीमारी के आखिरी चरणों में डॉक्टर के पास पहुंचती हैं। आंकड़ों की बात करें तो भारत में हर साल लगभग सवा लाख से अधिक महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की शिकार होती हैं। इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य लगते हैं, जिससे महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं। डॉ. प्रियंका गुप्ता बताती हैं कि यदि महिलाएं तीस साल की उम्र के बाद हर तीन से पांच साल में एक बार भी अपनी स्क्रीनिंग करवा लें, तो इस बीमारी को शरीर में पैर पसारने से पहले ही पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। समय पर पहचान ही इस बीमारी का सबसे बड़ा और प्रभावी इलाज है।
लक्षण और बचाव के तरीके
सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को लेकर सतर्क रहना चाहिए। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- माहवारी के चक्र से अलग या शारीरिक संबंध बनाने के बाद असामान्य रूप से खून बहना।
- सफेद पानी (व्हाइट डिस्चार्ज) का बहुत गाढ़ा होना, उसमें से तेज दुर्गंध आना या लगातार बहना।
- कमर के निचले हिस्से, पेट और पेल्विक एरिया में बिना किसी वजह के लगातार तेज दर्द बने रहना।
बचाव की बात करें तो नौ से चौदह वर्ष की बालिकाओं को एचपीवी का टीका लगवाना सबसे सुरक्षित तरीका माना गया है। वहीं, शादीशुदा महिलाओं के लिए नियमित अंतराल पर पैप स्मीयर (Pap Smear) टेस्ट कराना सबसे कारगर उपाय है, जिससे कैंसर से पहले की कोशिकाओं की पहचान हो जाती है।
फुल्लीडुमर मॉडल का रोडमैप
इस अभियान को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित न रखकर सुदूर गांवों तक पहुंचाने की एक ठोस रणनीति बनाई गई है। इसके तहत फुल्लीडुमर सीएचसी के अधीन काम करने वाले सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (APHC), हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों और स्वास्थ्य उप-केंद्रों (HSC) पर विशेष स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे। प्रशासन ने सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) और एएनएम (ANM) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहें। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर आशा कार्यकर्ताओं की मदद से कम से कम पचास ऐसी महिलाओं की सूची तैयार की जाएगी जो जांच के दायरे में आती हैं और उनकी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाएगी। यह जमीनी ढांचा ग्रामीण महिलाओं के मन से डर और संकोच को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
सदर अस्पताल में मुफ्त सेवाएं
ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों को जांच और इलाज के लिए महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए बांका सदर अस्पताल में सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। डॉ. संजीव कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि स्क्रीनिंग के दौरान जिन महिलाओं में किसी भी तरह के संदिग्ध लक्षण या शुरुआती संकेत पाए जाएंगे, उन्हें आगे के टेस्ट और बेहतर इलाज के लिए तुरंत सदर अस्पताल भेजा जाएगा। वहां कैंसर की आवश्यक दवाएं, जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में पूरा उपचार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार की इस पहल से गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
ग्रामीण स्वास्थ्य में बड़ा कदम
“स्वास्थ्य सेवाओं को जब तक हम लोगों के दरवाजे तक नहीं ले जाएंगे, तब तक ग्रामीण भारत से गंभीर बीमारियों का उन्मूलन संभव नहीं है। फुल्लीडुमर का यह अभियान इसी दिशा में एक बड़ा बदलाव है।”
इस व्यापक मुहिम को सफल बनाने में स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र पूरी सक्रियता से जुट गया है। जागरूकता अभियान के दौरान डॉ. नवीन भारती, ब्लॉक हेल्थ मैनेजर (BHM), ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर (BCM) सहित बड़ी संख्या में एएनएम, जीएनएम और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे। जब तक घर की महिलाएं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देंगी, तब तक कोई भी सामाजिक अभियान सफल नहीं हो सकता। इसलिए, इस अभियान के माध्यम से न केवल जांच की जा रही है, बल्कि महिलाओं को खुद की सेहत के लिए समय निकालने और खुलकर अपनी समस्याओं पर बात करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।








