सुपौल,अंग भारत। सुपौल के सदर अस्पताल में बृहस्पतिवार को डायरिया नियंत्रण अभियान के तहत एक विशेष जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। सिविल सर्जन बाबू साहब झा ने इस रथ को रवाना करते हुए बताया कि अगले 25 दिनों तक चलने वाले इस सघन अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को डायरिया जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूक करना और बच्चों को इससे बचाना है। डायरिया से होने वाली बच्चों की मौत को केवल थोड़ी सी सावधानी, सही स्वच्छता आदतों, रोटावायरस वैक्सीन और उचित स्तनपान के जरिए पूरी तरह रोका जा सकता है। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों को हाथ धोने के सही तरीकों और ओआरएस (ORS) के इस्तेमाल के बारे में जागरूक करेगी ताकि बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।
सदर अस्पताल में शुरुआत
सदर अस्पताल सुपौल में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के बड़े स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। सिविल सर्जन बाबू साहब झा ने खुद गाड़ी को हरी झंडी दिखाई। यह रथ अगले 25 दिनों तक सुपौल के अलग-अलग गांवों और कस्बों में घूमेगा। इस मौके पर डॉक्टर एसपी सिन्हा, डीआर ममता कुमारी, अस्पताल के मैनेजर, एएनएम (ANM) की छात्राएं और कई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। इन सभी का एक ही लक्ष्य है – डायरिया मुक्त सुपौल। रथ के माध्यम से लाउडस्पीकर और पंपलेट बांटकर लोगों को बीमारी के लक्षणों और उसके इलाज के बारे में बताया जाएगा। डॉक्टरों का मानना है कि जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है। जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक ऐसी बीमारियों से पूरी तरह लड़ना मुश्किल है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने इस रथ को सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी भेजने की योजना बनाई है।
“गंदगी और अनदेखी ही डायरिया की असली जड़ हैं। अगर हम बच्चों की साफ-सफाई पर ध्यान दें, समय पर टीका लगवाएं और केवल मां का दूध ही पिलाएं, तो कोई भी बच्चा इस बीमारी का शिकार नहीं होगा।” – सिविल सर्जन बाबू साहब झा
बीमारी फैलने की वजह
सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि आखिर डायरिया फैलता कैसे है। इसके पीछे मुख्य रूप से दूषित पानी और गंदगी जिम्मेदार है। जब बच्चे शौच करते हैं, तो उनके मल को साफ करने के बाद माताएं अक्सर अपने हाथ अच्छी तरह नहीं धोतीं। इससे उनके हाथों में कीटाणु रह जाते हैं। यही हाथ जब खाने-पीने की चीजों में लगते हैं, तो बीमारी सीधे पेट में पहुंच जाती है। दूसरी बड़ी वजह है पीने के पानी के स्रोत का दूषित होना। यदि कुएं या चापाकल के आसपास गंदगी होगी, तो पानी जहरीला हो जाएगा। इसके अलावा खुले में शौच करने से मक्खियां गंदगी पर बैठती हैं और फिर वही मक्खियां खुले रखे भोजन को दूषित कर देती हैं। बच्चों के मल को खुले में फेंकने से पूरी जमीन और आसपास की हवा दूषित हो जाती है। गंदे बर्तनों में खाना खाने या बिना धोए फल और सब्जियां खाने से संक्रमण तेजी से फैलता है।
बचाव के सरल तरीके
डायरिया से बचना बहुत आसान है, बस अपनी दैनिक आदतों में थोड़ा बदलाव करना होगा। सिविल सर्जन बाबू साहब झा ने साफ तौर पर कहा कि हाथ धोने की आदत ही इस बीमारी को आधा कर देती है। शौच के बाद और खाना बनाने या खाने से पहले साबुन से हाथ धोना बहुत जरूरी है। बच्चों को खाना खिलाने से पहले भी माताओं को अपने हाथ अच्छी तरह साफ करने चाहिए। घर में पीने के पानी को हमेशा ढककर रखें और पानी निकालने के लिए डंडी वाले लोटे या साफ बर्तन का इस्तेमाल करें। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भोजन हमेशा ढककर रखा जाए ताकि उस पर मक्खियां न बैठ सकें। बासी खाना खाने से बचें और हमेशा ताजा व गर्म भोजन ही करें। अपने आसपास गंदगी जमा न होने दें और बच्चों को भी साफ-सफाई की आदतें सिखाएं।
स्तनपान और शिशु सुरक्षा
छोटे बच्चों में डायरिया होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसके लिए डॉक्टरों ने माताओं को विशेष सलाह दी है। जन्म के तुरंत बाद और पहले 6 महीने तक बच्चों को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए। इस दौरान बच्चे को बाहर का पानी या कोई अन्य दूध बिल्कुल न दें। मां का दूध बच्चे के लिए अमृत समान होता है जो उसे संक्रमण से बचाता है। यदि बच्चे को दस्त या डायरिया हो भी जाए, तो भी मां का दूध पिलाना बंद नहीं करना चाहिए। स्तनपान जारी रखने से बच्चे के शरीर में कमजोरी नहीं आती और उसे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा नहीं होता। बच्चे के बीमार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और खुद से कोई दवाई न दें।
टीकाकरण क्यों जरूरी?
डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से परमानेंट सुरक्षा के लिए टीकाकरण का चक्र पूरा करना बेहद जरूरी है। इस अभियान में रोटावायरस वैक्सीन और विटामिन ए की खुराक पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बच्चों की नियमित टीकाकरण सारणी के अनुसार सभी टीके समय पर लगवाएं। रोटावायरस वैक्सीन बच्चों को दस्त के गंभीर दौर से बचाती है। इसके साथ ही विटामिन ए की खुराक बच्चों की आंखों और उनकी इम्युनिटी को मजबूत करती है। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आशा कार्यकर्ता के संपर्क में रहें और बच्चों का कोई भी टीका न छोड़ें। टीका न केवल बच्चे को सुरक्षित रखता है बल्कि पूरे समाज को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।
त्वरित प्राथमिक उपचार गाइड
| मुख्य लक्षण | क्या करें (घरेलू उपाय) | कब जाएं डॉक्टर के पास |
|---|---|---|
| लगातार दस्त होना | ओआरएस (ORS) का घोल पिलाएं, स्तनपान जारी रखें। | यदि बच्चा सुस्त हो जाए या पेशाब न करे। |
| हल्का बुखार और उल्टी | साफ पानी, छाछ या नारियल पानी दें। हल्का खाना दें। | यदि दस्त के साथ खून आ रहा हो। |
| शरीर में पानी की कमी | ओआरएस के साथ जिंक (Zinc) की गोली डॉक्टर की सलाह पर दें। | यदि उल्टी के कारण कुछ भी पच न रहा हो। |








