कटिहार,अंगभारत। दर्शन साह महाविद्यालय (डी.एस. कॉलेज) में शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट और आधारभूत सुविधाओं की कमी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को कॉलेज अध्यक्ष प्रणव यादव के नेतृत्व में छात्र नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज प्राचार्य से मुलाकात कर समस्याओं के समाधान के लिए ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कैंपस की टूटी हुई दीवारों, पेयजल की किल्लत, जर्जर हो चुके कमरों और छात्राओं की सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया गया है। कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में है, जिसे देखते हुए अब छात्र संगठन ने आंदोलन का बिगुल फूँक दिया है।
जर्जर भवन और सुरक्षा
कॉलेज परिसर की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। वर्षों से मुख्य भवन में रंग-रोगन तक नहीं हुआ है, जिससे इसकी दीवारें उपेक्षित और वीरान दिखती हैं। सबसे खतरनाक स्थिति कमरा नंबर दो और तीन की है, जहाँ की छत से प्लास्टर गिरना और दीवारों में बड़ी दरारें आना अब सामान्य हो गया है। इन कमरों में बैठना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है। अभाविप ने मांग की है कि छात्र-छात्राओं की जान को जोखिम में डाले बिना इन कमरों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। इसके अलावा, कैंपस की चहारदीवारी का निर्माण अत्यंत आवश्यक है ताकि असामाजिक तत्वों का प्रवेश रोका जा सके। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और प्रशिक्षित गार्डों की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया है।
छात्राओं की अनदेखी
कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। गर्ल्स कॉमन रूम की वर्तमान स्थिति दयनीय है। यहाँ छात्राओं के बैठने के लिए समुचित बेंच और कुर्सियों का अभाव है, जिसकी वजह से उन्हें धूप में खड़े रहने या खुले में बैठने के लिए विवश होना पड़ता है। अभाविप ने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी दी है कि छात्राओं की गरिमा के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विद्यार्थियों की मांग है कि कॉलेज कैंपस के हर कोने में सीमेंटेड बेंच लगाए जाएं, ताकि छात्र-छात्राएं खाली समय में शांत वातावरण में अध्ययन कर सकें और अपने विषयों पर चर्चा कर सकें।
पढ़ाई और संसाधनों का संकट
शैक्षणिक संसाधनों का टोटा कॉलेज की प्रगति में सबसे बड़ा बाधक है। नई च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) प्रणाली लागू होने के बाद भी लाइब्रेरी में नए पाठ्यक्रम से संबंधित आधुनिक पुस्तकों का भारी अभाव है। छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इसी तरह, विज्ञान के छात्रों के लिए प्रयोगशालाएं केवल नाम की रह गई हैं। लैब्स में जरूरी उपकरण और रसायनों की कमी है, जिससे प्रैक्टिकल कक्षाएं बाधित हो रही हैं। निम्नलिखित तालिका के माध्यम से कॉलेज की प्रमुख समस्याओं को समझा जा सकता है:
| सुविधा | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| पेयजल | आरओ या वाटर कूलर का घोर अभाव |
| प्रयोगशाला | उपकरण और रसायनों की भारी कमी |
| लाइब्रेरी | CBCS पाठ्यक्रम की नई किताबों का अभाव |
| बैठने की व्यवस्था | पर्याप्त बेंच और डेस्क का न होना |
बुनियादी जरूरतें और अनुशासन
कटिहार की भीषण गर्मी और उमस के बीच छात्रों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है। कॉलेज प्रशासन से मांग की गई है कि परिसर में आरओ और वाटर कूलर लगाए जाएं। साथ ही, क्लासरूम में पर्याप्त बिजली के पंखे लगवाना अनिवार्य है। कैंपस में बाहरी अराजक तत्वों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सभी छात्रों के लिए आईडी कार्ड पहनना अनिवार्य किया जाए। छात्रों की सुविधा के लिए एक व्यवस्थित साइकिल और बाइक स्टैंड का निर्माण भी ज्ञापन का हिस्सा है।
शिक्षकों की लेटलतीफी
अभाविप ने कॉलेज के शिक्षकों की कक्षाओं में अनियमितता पर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। अक्सर शिक्षक समय पर क्लास में नहीं पहुंचते, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से मेहनत कर कॉलेज आने वाले छात्रों का समय व्यर्थ होता है। छात्रों का कहना है कि वे केवल पढ़ाई के लिए आते हैं और यदि शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तो शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा।
डेलिगेशन में शामिल सदस्य
इस ज्ञापन को सौंपते समय निम्नलिखित छात्र नेताओं ने कॉलेज प्रशासन को सख्त चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा:
- विनय सिंह – प्रदेश सहमंत्री
- प्रणव यादव – कॉलेज अध्यक्ष
- शिवम यादव – कॉलेज उपाध्यक्ष
- सत्यम कुमार – प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
- रोहन पासवान – सक्रिय कार्यकर्ता
- विशाल सिंह – सक्रिय कार्यकर्ता
- पंकज कुमार यादव – सक्रिय कार्यकर्ता
- शिव यादव – सक्रिय कार्यकर्ता
इन सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में प्रशासन से कहा है कि छात्रों के धैर्य की परीक्षा न ली जाए। कॉलेज के शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए बजट जारी करना और संसाधनों की व्यवस्था करना अब कॉलेज प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।








