Founder – Mohan Milan

हर-हर महादेव के जयघोष के बीच 54 फीट की कांवर लेकर बाबाधाम रवाना हुए श्रद्धालु

सुल्तानगंज से बाबाधाम जा रहे शिवभक्तों द्वारा उठाई गई 54 फीट लंबी भव्य कांवर और बोल बम का नारा लगाते कांवरियों का विशाल जत्था।

भागलपुर,अंग भारत। सावन के पवित्र महीने में अजगैबीनाथ धाम (सुल्तानगंज) से देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर जाने वाले शिवभक्तों के बीच इस बार एक अनोखा आकर्षण चर्चा का विषय बना हुआ है। पटना सिटी के ‘श्री विशाल शिवधारी संघ’ द्वारा लाया गया 54 फीट लंबा और भव्य कांवड़ इस समय कच्ची कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है, जिसे उठाने के लिए एक साथ नौ लोगों की जरूरत पड़ रही है। आमतौर पर श्रद्धालु चार से सात फीट का कांवड़ लेकर चलते हैं, लेकिन 500 से 600 श्रद्धालुओं के इस जत्थे ने अपनी आस्था, एकता और सनातन परंपरा को प्रदर्शित करने के लिए इस विशालकाय कांवड़ का निर्माण किया है, जो 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय कर देवघर बाबाधाम पहुंचेगा।

54 फीट कांवड़ की खासियत

इस बार सावन में सुल्तानगंज से देवघर के बीच की दूरी तय करने वाले शिवभक्त इस विशाल कांवड़ को देखकर हैरान हैं। आमतौर पर कांवरिया अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार छोटा कांवड़ कंधे पर रखते हैं। लेकिन पटना सिटी से आए श्री विशाल शिवधारी संघ का यह प्रयोग बिल्कुल अलग है। इस कांवड़ को रंग-बिरंगे कपड़ों, चमकीले घुंघरुओं और विभिन्न देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाओं से सजाया गया है। कांवड़ की बनावट को संतुलित रखने के लिए मजबूत बांस और विशेष लकड़ियों का ढांचा तैयार किया गया है। जब यह जत्था कच्ची सड़क से गुजरता है, तो घुंघरुओं की खनक से पूरा वातावरण गूंज उठता है। रास्ते में खड़े लोग न सिर्फ इसे निहार रहे हैं, बल्कि इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद कर रहे हैं।

नौ कांवरियों का अनूठा तालमेल

इतने बड़े और भारी कांवड़ को संभालना आसान नहीं होता। इसके भारी वजन और अत्यधिक लंबाई के कारण इसे संतुलित रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसे उठाने के लिए एक साथ नौ कांवरियों की आवश्यकता होती है। इन सभी नौ लोगों के कदमों का तालमेल और चलने की गति बिल्कुल एक समान होनी चाहिए, अन्यथा संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। इस पूरे जत्थे में करीब 500 से 600 श्रद्धालु शामिल हैं। जब एक समूह लगातार चलकर थक जाता है, तो जत्थे में मौजूद दूसरे शिवभक्त बिना यात्रा रोके तुरंत उनकी जगह ले लेते हैं। यह अद्भुत टीम वर्क का उदाहरण है, जहां बिना किसी होड़ के, बारी-बारी से कंधे बदलकर इस विशाल कांवड़ को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

मात्र 48 घंटे में निर्माण

इस भव्य कांवड़ की सबसे हैरान करने वाली बात इसका निर्माण समय है। श्री विशाल शिवधारी संघ के सदस्यों के अनुसार, इसे बनाने में केवल 48 घंटे यानी सिर्फ दो दिन का समय लगा। संघ के स्थानीय कलाकारों और श्रद्धालुओं ने दिन-रात मेहनत करके इस विशाल संरचना को तैयार किया। इसमें इस्तेमाल की गई लकड़ियों की मजबूती और रस्सियों का जुड़ाव काफी सोच-समझकर किया गया है ताकि यह 105 किलोमीटर की पथरीली और धूल भरी यात्रा को बिना किसी नुकसान के पूरा कर सके। इस त्वरित और मजबूत निर्माण के पीछे भक्तों का अटूट विश्वास और संकल्प साफ दिखाई देता है।

धार्मिक और सामाजिक संदेश

कांवरियों के इस समूह का उद्देश्य केवल देवघर पहुंचकर जलाभिषेक करना ही नहीं है। इस यात्रा के जरिए वे समाज को एक बड़ा संदेश देना चाहते हैं। संघ के सदस्यों का कहना है कि इस विशाल कांवड़ को उठाने के लिए जिस आपसी समन्वय, तालमेल और एकता की आवश्यकता होती है, वही एकजुटता हमें अपने समाज में भी लानी चाहिए। यह कांवड़ केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और विश्व शांति का भी संदेश देता है। जब सैकड़ों लोग एक साथ मिलकर बिना किसी भेदभाव के “बोल बम” का नारा लगाते हुए आगे बढ़ते हैं, तो वह दृश्य समाज से हर तरह की दूरियों को मिटा देता है।

105 किलोमीटर का कठिन सफर

सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से पवित्र गंगाजल भरकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक जाने वाली यह 105 किलोमीटर की यात्रा बेहद कठिन मानी जाती है। कच्ची सड़क की गर्म बालू, सुइया पहाड़ की कठिन चढ़ाई, तेज धूप और अचानक होने वाली बारिश भक्तों की परीक्षा लेती है। पैरों में छाले पड़ने के बावजूद शिवभक्तों का हौसला डगमगाता नहीं है। रास्ते भर ढोल-मंजीरे की थाप और चारों तरफ गूंजते “बोल बम” के जयकारे भक्तों की सारी थकान को हर लेते हैं। श्री विशाल शिवधारी संघ की यह अनोखी यात्रा हर साल इस कांवरिया पथ पर एक नई मिसाल पेश करती है, और इस बार का 54 फीट का कांवड़ इस यात्रा को और भी भव्य बना रहा है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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