भागलपुर,अंग भारत। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) परिसर के अल्पसंख्यक छात्रावास में कथित अवैध कब्जे के खिलाफ छात्र जदयू ने जोरदार मोर्चा खोल दिया है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय अध्यक्ष मोहम्मद एहसान उल राजा उर्फ डेविड के नेतृत्व में छात्रों ने गुरुवार को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रावास अधीक्षक की मिलीभगत से चल रहे अवैध कब्जे को समाप्त करना और दूर-दराज से आने वाले गरीब व पात्र छात्रों को उनका हक दिलाना है। छात्रों का सीधा आरोप है कि नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर हॉस्टल में अनाधिकृत लोगों को बसाया गया है, जिससे वास्तविक जरूरतमंद छात्र सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।
विवाद का मुख्य कारण
विश्वविद्यालय परिसर में बना अल्पसंख्यक छात्रावास सुदूर ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए एक बड़ा सहारा है। लेकिन, हाल के दिनों में इस हॉस्टल की पूरी व्यवस्था अराजकता की भेंट चढ़ गई है। छात्र जदयू का आरोप है कि छात्रावास अधीक्षक की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा अवैध कब्जा मुमकिन ही नहीं है। पैसे और रसूख के बल पर उन लोगों को कमरे आवंटित कर दिए गए हैं, जो विश्वविद्यालय के नियमित छात्र भी नहीं हैं। इस धांधली के कारण भागलपुर के आसपास के ग्रामीण इलाकों, बांका, जमुई और मुंगेर जैसे जिलों से पढ़ाई करने आए गरीब छात्रों को रहने की जगह नहीं मिल पा रही है।
प्रदर्शन और नारेबाजी
गुरुवार को हुए इस प्रदर्शन के दौरान छात्र जदयू के कार्यकर्ताओं और आम छात्रों का आक्रोश साफ देखने को मिला। विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के सामने भारी संख्या में जुटे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद एहसान उल राजा उर्फ डेविड ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रावास का निर्माण छात्रों की शैक्षणिक मदद के लिए किया गया है, न कि अवैध कब्जेदारों को शरण देने के लिए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि प्रशासन को अब अपनी नींद से जागना होगा और हॉस्टल को अवैध तत्वों से मुक्त कराना होगा।
पीड़ित छात्रों की परेशानी
सरकारी छात्रावासों में कम खर्च में रहने की सुविधा मिलने से गरीब परिवारों के बच्चे अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर पाते हैं। लेकिन टीएमबीयू के इस हॉस्टल में मचे घमासान के कारण वास्तविक रूप से हकदार छात्रों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरी में शहर के महंगे प्राइवेट कमरों और लॉज में रहना पड़ रहा है, जिसका खर्च उठाना उनके परिवारों के लिए बेहद मुश्किल है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी बताया कि हॉस्टल में अवैध लोगों के रहने से वहां का शैक्षणिक माहौल भी पूरी तरह खराब हो चुका है और सुरक्षा को लेकर भी डर का माहौल बना रहता है।
छात्र जदयू की मांगें
छात्र जदयू ने इस पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष कुछ स्पष्ट और गंभीर मांगें रखी हैं, जिन पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है:
- छात्रावास के प्रत्येक कमरे की भौतिक जांच (Physical Verification) कराई जाए ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान हो सके।
- कमरों में रह रहे लोगों के पहचान पत्र, आधार कार्ड और विश्वविद्यालय के नामांकन रसीद की कड़ाई से जांच की जाए।
- कथित रूप से संलिप्त छात्रावास अधीक्षक को तुरंत पद से हटाकर उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी जांच शुरू की जाए।
- सभी अवैध कब्जाधारियों को पुलिस बल की मदद से तत्काल बाहर निकाला जाए और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो।
आगे की कड़ी चेतावनी
धरने के अंत में मोहम्मद एहसान उल राजा उर्फ डेविड ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ निजी दुश्मनी नहीं है, बल्कि यह छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और हॉस्टल व्यवस्था में सुधार की लड़ाई है। यदि प्रशासन ने इस मामले में जल्द ही कोई ठोस और निष्पक्ष कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में छात्र जदयू उग्र और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा। छात्रों ने कहा कि इसके बाद होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या तालाबंदी की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।







