नई दिल्ली,अंग भारत। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए पीजी हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन विभाग, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें मलबा हटाने में जुटी हैं। अब तक 10 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। मलबे में अभी और लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है।
पी-14 इमारत में हुआ हादसा
हादसा सत्य निकेतन की रिहायशी कॉलोनी में स्थित पी-14 इमारत में हुआ। यह इमारत पेइंग गेस्ट (पीजी) के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। बताया जा रहा है कि इमारत का निर्माण 1990 के दशक में हुआ था। रविवार दोपहर हुए इस हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई।घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए जेसीबी और अन्य उपकरणों की मदद ली गई। बचाव दल बेहद सावधानी से मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।
मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी
रेस्क्यू टीमों का पूरा ध्यान इस समय मलबे के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने पर है। एनडीआरएफ और दमकल विभाग के जवान मलबे के एक-एक हिस्से की जांच कर रहे हैं। पुलिस और अन्य एजेंसियां भी अभियान में सहयोग कर रही हैं।अब तक 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। वहीं, छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हादसे में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है। बचाव अभियान के दौरान किसी और व्यक्ति के दबे होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
पीजी इमारतों की सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी आबादी वाले इलाकों में कई इमारतों का इस्तेमाल रिहायशी के साथ-साथ पीजी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता है।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन इमारतों में निर्माण मानकों, अग्निशमन सुरक्षा और अन्य जरूरी नियमों का कितना पालन किया जा रहा है। हादसे के बाद प्रशासन के सामने ऐसी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
सरकार ने न्यायिक जांच के दिए आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने हादसे की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने कथित मालिक हरि राम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हादसे के पीछे क्या कारण रहे और इमारत की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती गई।जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
उपराज्यपाल ने लिया जायजा
उप राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने हादसे पर गहरी चिंता जताई और दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, डीडीएमए समेत सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से राहत और बचाव कार्य चलाने का निर्देश दिया।उन्होंने अधिकारियों से बचाव अभियान की प्रगति की जानकारी भी ली और मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए सभी जरूरी संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी की
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री के साथ मंत्री कपिल मिश्रा, मेयर प्रवेश वाही, सांसद बांसुरी स्वराज और विधायक अनिल शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। सभी ने बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया।
जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से फोन पर बातचीत कर हादसे की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने केंद्र की ओर से दिल्ली सरकार को हर जरूरी मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।उन्होंने एम्स नई दिल्ली और दिल्ली के केंद्रीय सरकारी अस्पतालों के निदेशकों को भी घायलों को हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।फिलहाल बचाव अभियान लगातार जारी है। छह लोगों की मौत के बाद हादसे ने इलाके में मातम का माहौल पैदा कर दिया है। वहीं, प्रशासन की कोशिश है कि मलबे में फंसे अन्य लोगों का जल्द पता लगाया जाए और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाए। हादसे की न्यायिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।








