Founder – Mohan Milan

सप्तमी की रात छागर बलि के साथ शुरू होगी पूजा, 1951 में हुई थी नया हाट दुर्गा मंदिर की स्थापना

कटिहार के नया हाट दुर्गा मंदिर में सप्तमी की रात छागर बलि प्रथा का आयोजन

मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु देते हैं छागर की बलि, कभी बैलगाड़ियों से मेला घूमने आते थे दूर-दराज के लोग

कुरसेला (कटिहार),अंगभारत| शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर शनिवार को प्रखंड क्षेत्र के प्रमुख दुर्गा मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलेंगे। इसके साथ ही मां दुर्गा की आराधना के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगेगी। कुरसेला क्षेत्र के अयोध्यागंज बाजार स्थित वैष्णवी दुर्गा मंदिर, मालगोदाम स्थित रेलवे दुर्गा मंदिर और नया चौक स्थित नया हाट दुर्गा मंदिर में पूजा की विशेष तैयारियां की गई हैं। इनमें नया हाट दुर्गा मंदिर अपनी ऐतिहासिक परंपरा और छागर बलि की प्रथा के लिए विशेष पहचान रखता है।मंदिर में सप्तमी को भगवती को डोली पर विराजमान कर त्रिमोहनी संगम तट पर स्नान ध्यान के बाद विधिवत पूजा कर युवकों के द्वारा डोली को मंदिर लाया जाता है, विधि विधान से पूजा के बाद सप्तमी की रात छागर बलि देने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना शुरू होती है। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मां भगवती को छागर की बलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और सैकड़ों छागरों की बलि दी जाती है।कुरसेला स्टेट के अद्वैत सिंह के अनुसार, नया हाट दुर्गा मंदिर की स्थापना वर्ष 1951 में की गई थी। मंदिर का निर्माण राय बहादुर रघुवंश प्रसाद सिंह के बड़े पुत्र और कटिहार के प्रथम सांसद स्वर्गीय अवधेश कुमार सिंह की देखरेख में कराया गया था। उनकी असामयिक मृत्यु के बाद मंदिर का विकास कार्य अधूरा रह गया। इसके बाद लंबे समय तक कच्चे फर्श पर ही मां भगवती की पूजा-अर्चना होती रही।वर्ष 2004 में राय बहादुर रघुवंश प्रसाद सिंह के सबसे छोटे पौत्र पंकज कुमार सिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इस दौरान फर्श और दीवारों को पक्का कराया गया। वर्तमान में मंदिर की पूजा-पाठ और रखरखाव का खर्च हाट से होने वाली आमदनी तथा पारिवारिक सहयोग से पूरा किया जाता है। निजी मंदिर होने के बावजूद यहां सार्वजनिक रूप से पूजा होती है और श्रद्धालुओं से चंदा नहीं लिया जाता है।
बैलगाड़ियों से मेला घूमने आते थे लोग :_____
बताया जाता है कि राय बहादुर रघुवंश प्रसाद सिंह ने वर्ष 1927 में अयोध्यागंज बाजार स्थित दुर्गा मंदिर की स्थापना कराई थी। वहां श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए बाद में नया चौक स्थित नया हाट दुर्गा मंदिर की स्थापना कर पूजा-पाठ और मेले की परंपरा शुरू की गई।एक समय इस मेले की प्रसिद्धि दूर-दूर तक थी। आसपास के इलाकों से लोग बैलगाड़ियों पर सवार होकर मेला घूमने आते थे। कई लोग टेंट लगाकर रात में ठहरते और मेले का आनंद लेते थे। समय के साथ मेले का स्वरूप सिमटता गया। अब मेला सीमित जगह में ही लगता है, लेकिन मंदिर की धार्मिक आस्था और पुरानी परंपराएं आज भी कायम हैं।
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon