काठमांडू,अंग भारत। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात ‘अर्नब’ का असर अब नेपाल तक पहुंच गया है। चक्रवात के खतरनाक रूप लेने के बाद नेपाल सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने गुरुवार से शनिवार तक विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
हिमालय से तराई तक असर की आशंका -: चक्रवात का असर हिमालयी क्षेत्र से लेकर तराई तक पड़ने की आशंका है। इसे देखते हुए सरकार ने सभी सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित निकायों को तैयार रहने को कहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि अगले तीन दिन बेहद अहम हैं और इस दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी गई है।
बुधवार को आंध्र तट पर लैंडफाल-: भारत के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार चक्रवात ‘अर्नब’ बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफाल कर गया। इसका बाहरी घेरा धीरे-धीरे उत्तर और पूर्वोत्तर की ओर बढ़ रहा है। नेपाल में फिलहाल पश्चिमी हवाओं का आंशिक प्रभाव बना हुआ है। मौसम पूर्वानुमान महाशाखा के अनुसार बुधवार को कोशी, मधेश, बागमती और लुंबिनी प्रदेश में सामान्य रूप से बादल छाए रह सकते हैं, जबकि कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेश में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है।
गुरुवार से बढ़ेगा चक्रवात का प्रभाव-: महाशाखा के अनुसार असली असर गुरुवार से दिखना शुरू होगा। गुरुवार को कोशी, मधेश और बागमती प्रदेश के कुछ स्थानों पर तथा गंडकी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेश के एक-दो स्थानों पर मध्यम बारिश या बर्फबारी हो सकती है। शुक्रवार और शनिवार को इसका प्रभाव और अधिक बढ़ने की आशंका है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी विभूति पोखरेल ने बताया कि इन दो दिनों में कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि कर्णाली और सुदूरपश्चिम के हिमाली और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ बर्फबारी होने की संभावना है।
ऊपरी वायुमंडल की प्रणाली से टकराव -: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार चक्रवात के बाहरी घेरे के बादल नेपाल तक पहुंचेंगे। ऊपरी वायुमंडल में पहले से मौजूद प्रणाली के साथ इनके मिलने से बारिश और बर्फबारी की स्थिति बनेगी। मौसम पूर्वानुमान महाशाखा की प्रवक्ता विभूति पोखरेल ने कहा कि फिलहाल घबराने की स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने लोगों को मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी लेते रहने की सलाह दी।
जनजीवन और यातायात पर असर की आशंका -: बारिश और बर्फबारी के कारण हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। सड़क यातायात बाधित होने, पहाड़ी रास्तों के बंद होने और दैनिक गतिविधियों के रुकने की आशंका है। इसे देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा गया है। विशेष रूप से नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
ट्रेकिंग और पर्वतारोहण पर रोक-: संभावित खतरे को देखते हुए प्राधिकरण ने पर्यटकों, पदयात्रियों और पर्वतारोहियों से अपील की है कि वे अगले तीन दिनों तक उच्च पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा न करें। आव्रजन विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए ट्रेकिंग पर रोक लगा दी है। जो लोग पहले से ही ट्रेकिंग पर गए हुए हैं, उन्हें मौसम खराब रहने तक सुरक्षित स्थानों पर रुकने को कहा गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण ट्रेकिंग मार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं और यात्रा जोखिम भरी हो सकती है।
शुक्रवार और शनिवार को ज्यादा सतर्कता-: मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश में मौसम ज्यादा प्रतिकूल रह सकता है। इन क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाएं चलने की आशंका है। कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेश में भी गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश और एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी, हिमआंधी और हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।
हेल्पलाइन नंबर जारी-: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। मौसम संबंधी जानकारी के लिए 1155 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा राष्ट्रीय एवं जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के लिए 1234, नेपाल पुलिस के लिए 100, सशस्त्र पुलिस बल के लिए 1114 और पर्यटक पुलिस के लिए 1144 नंबर जारी किया गया है। प्राधिकरण ने लोगों से मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने और संबंधित निकायों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।







