भागलपुर, अंग भारत। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग में करीब 30 लाख रुपये की पुस्तक खरीद का मामला अब विश्वविद्यालय प्रशासन के गले की फांस बनता जा रहा है। पुस्तक खरीद में वित्तीय अनियमितता, टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी और बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दाम पर किताबें खरीदने का आरोप है। अब यह मामला प्रथम अपील तक पहुंच गया है।आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बिहार लोक शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत इस मामले में प्रथम अपील दायर की है। प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित की गई है।
600 की किताब 5000 में खरीदने का आरोप -: शिकायतकर्ता डॉ. संतोष श्रीवास्तव के अनुसार, पूरी खरीद प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर भारी गड़बड़ी की गई है। आरोप है कि बाजार में जिन पुस्तकों की वास्तविक कीमत 600 से 700 रुपये थी, उन्हें विभाग द्वारा 4000 से 5000 रुपये प्रति पुस्तक की दर पर खरीदा गया है।शिकायत में कहा गया है कि खरीद से जुड़ी सरकारी फाइलों में निर्धारित टेंडर प्रक्रिया का पालन किए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रारंभिक तौर पर केवल 279 पुस्तकों की खरीद की अनुमति ली गई थी, लेकिन नियमों की अनदेखी कर बाद में 800 से अधिक पुस्तकें खरीद ली गईं।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से बढ़ा विवाद -: विश्वविद्यालय स्तर पर पूर्व में इस मामले को लेकर आंतरिक जांच की सुगबुगाहट हुई थी, लेकिन जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने से विवाद और गहरा गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन पर शुरू से ही जांच रिपोर्ट को छिपाने और दोषियों को बचाने के आरोप लगते रहे हैं।छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि उच्च शिक्षा के इस प्रतिष्ठित केंद्र में इस तरह की वित्तीय हेराफेरी गंभीर चिंता का विषय है।अब सबकी नजरें 6 नवंबर को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां विश्वविद्यालय प्रशासन को इन वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े तीखे सवालों के जवाब देने होंगे।







