नई दिल्ली,अंग भारत। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत शिकायत निवारण नियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत योजना से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और समयबद्ध व्यवस्था बनाई गई है। नए नियमों के अनुसार अब शिकायत की जांच 7 दिनों में और निपटारा 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि ग्रामीण नागरिकों की समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई हो सके।
तीन स्तरों पर बनेगी व्यवस्था -: नियमों के तहत राज्य सरकारों को ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करनी होगी। हर स्तर पर नामित शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, जांच और निपटारा करने के लिए जिम्मेदार होंगे।जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे। वे सुनिश्चित करेंगे कि शिकायतों का समाधान निर्धारित व्यवस्था और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से हो।
ऐसे दर्ज करा सकेंगे शिकायत -: शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाया गया है। कोई भी व्यक्ति योजना के क्रियान्वयन से जुड़े किसी भी मामले में शिकायत कर सकता है। इसके लिए कई माध्यम दिए गए हैं -नामित शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से शिकायत देनास्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजनाकेंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ऑनलाइन शिकायत करना टेलीफोन, हेल्पलाइन या राज्य सरकार द्वारा तय किसी अन्य माध्यम से शिकायत करना भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों को उसी दिन डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करना होगा। यदि किसी कारण से उसी दिन संभव न हो तो अगले कार्य दिवस तक पंजीकरण अनिवार्य होगा।
पावती देना अनिवार्य, प्रारूप के नाम पर इनकार नहीं -: शिकायत पंजीकृत होते ही शिकायतकर्ता को पावती दी जाएगी। इसमें पंजीकरण संख्या, शिकायत मिलने की तारीख और अधिकारी का पदनाम दर्ज होगा। ऑनलाइन शिकायत पर इलेक्ट्रॉनिक पावती और ऑफलाइन शिकायत पर भौतिक पावती दी जाएगी।महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत के प्रारूप, भाषा या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर पंजीकरण से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि औपचारिकताओं के कारण किसी नागरिक को वंचित न होना पड़े।
जांच और निपटारे की समय-सीमा तय -: नियमों में स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। नामित अधिकारी प्रत्येक शिकायत की जांच करेंगे और जरूरी रिकॉर्ड, रजिस्टर, दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक डेटा मंगा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पक्ष रखने का मौका भी दिया जाएगा।शिकायत मिलने की तारीख से 7 कार्य दिवसों के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद अधिकारी निष्कर्ष दर्ज कर सुधारात्मक कार्रवाई करेंगे। हर शिकायत का निपटारा 15 दिनों के भीतर करना होगा। जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई को डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा और शिकायतकर्ता को सूचित किया जाएगा।यदि 15 दिनों में शिकायत का निपटारा नहीं होता है तो उसे स्वतः अगले उच्च स्तर पर भेज दिया जाएगा। वहां उसकी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तब तक जारी रहेगी जब तक समाधान नहीं हो जाता।
अपील का भी प्रावधान -: नियमों में पारित आदेशों के विरुद्ध अपील का भी प्रावधान है। ऐसी अपील वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची-I के अनुसार दायर और निस्तारित की जाएगी।केंद्र सरकार का कहना है कि यह अधिसूचना ग्रामीण परिवारों के अधिकारों और पात्रता के संरक्षण को मजबूत करेगी और योजना के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाएगी।







