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गंगा जल समझौते पर बांग्लादेश में सियासी गर्मी, भारत के ट्रांजिट पर रोक लगाने की मांग

ढाका, अंग भारत। बांग्लादेश में गंगा जल बंटवारे को लेकर सियासत गरमा गई है। नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नाहिद इस्लाम ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि बांग्लादेश को गंगा के पानी में उसका उचित हिस्सा नहीं मिला तो भारत को बांग्लादेश के रास्ते ट्रांजिट और कॉरिडोर की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर फरक्का तक एक बार फिर लंबा मार्च निकालने की भी चेतावनी दी है।बांग्लादेश के अंग्रेजी दैनिक ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, नाहिद इस्लाम ने रविवार को ढाका के खमारबारी स्थित कृषिबिद इंस्टीट्यूशन में ‘जातीय जुबो शक्ति’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

भारत को दी ट्रांजिट रोकने की चेतावनी -: नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारत के साथ बांग्लादेश के संबंधों का आधार पानी का उचित बंटवारा और सीमा सुरक्षा होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर बांग्लादेश को पानी नहीं मिलता है, तो भारतीय सामान भी बांग्लादेश में नहीं आ पाएंगे। कोई कॉरिडोर नहीं होगा और कोई ट्रांजिट नहीं होगा।”उन्होंने भारत को किसी भी तरह की गैरकानूनी कॉरिडोर या ट्रांजिट सुविधा देने का विरोध किया और कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।गौरतलब है कि गंगा जल बंटवारा संधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि नए समझौते में बांग्लादेश के हिस्से के पानी की गारंटी के साथ नदी में नौवहन की सुविधा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने मौलाना अब्दुल हामिद खान भाषानी के ऐतिहासिक फरक्का मार्च का जिक्र किया।

बीएनपी सरकार पर भी साधा निशाना -: आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए नाहिद इस्लाम ने संविधान सुधार परिषद के तत्काल गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि फरवरी में हुए जनमत संग्रह के फैसले के अनुरूप जुलाई के नेशनल चार्टर को लागू किया जाए। सरकार द्वारा संविधान संशोधनों पर विचार के लिए गठित संसदीय समिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही सभी मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है, अब फैसलों को लागू करने का समय है। उन्होंने कहा, “जनमत संग्रह के फैसले को लागू करें, वरना इस्तीफा दे दें।”एनसीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ बीएनपी ने जुलाई के जन-विद्रोह को व्यापक सुधारों की दिशा में ले जाने के बजाय केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा सरकार भी भेदभावपूर्ण रवैया अपनाती रही तो उसे भी अवामी लीग जैसी राजनीतिक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

नौकरी, वेतन और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल -: नाहिद ने 18 महीनों में एक करोड़ नौकरियां देने के चुनावी वादे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लोक सेवा आयोग में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए योग्यता के आधार पर भर्ती की मांग की।कपड़ा उद्योग के श्रमिकों की वेतन वृद्धि की मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई में 12,500 टका का न्यूनतम वेतन पर्याप्त नहीं है। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बजाय बातचीत से समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश में किसी और मजदूर का खून बहे।”इसके साथ ही उन्होंने कानून-व्यवस्था और ईंधन की कीमतों को लेकर गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई और घोषणा की कि जुलाई आंदोलन की अधूरी मांगों को लेकर एनसीपी नवंबर-दिसंबर में देशभर में कार्यक्रम आयोजित करेगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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