फुल्लीडुमर/बांका, अंगभारत। प्रखंड क्षेत्र के खेसर बाजार स्थित काली मंदिर का इतिहास करीब 170 वर्ष पुराना है। राजा-रजवाड़ों के दौर में स्थापित यह मंदिर आज भी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
1855 में महाराजा ने कराई थी स्थापना -: बताया जाता है कि सुल्तानगंज के महाराज के पूर्वजों ने वर्ष 1855 के आसपास इस मंदिर की स्थापना कराई थी। उस समय यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि अपनी भव्य सजावट और राजसी परंपराओं के लिए भी पूरे इलाके में प्रसिद्ध था।पूर्व मुखिया पंकज भगत बताते हैं कि उनके दादा-परदादा से सुनी जानकारी के अनुसार, उस दौर में महाराज अपनी रानी को डोली में बैठाकर खेसर लाते थे और उनके साथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना करते थे। पूजा के अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता था। यह भव्य आयोजन क्षेत्रीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हुआ करता था।
रियासत खत्म होने के बाद स्थानीय लोगों ने संभाली जिम्मेदारी -: रियासतों के समाप्त होने के बाद मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों ने संभाल ली। दशकों से संयुक्त पूजा समिति, खेसर के माध्यम से यहां धार्मिक अनुष्ठान और मां काली की पूजा-अर्चना की जा रही है। पुराने मंदिर के स्थान पर अब भव्य काली मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।
स्वच्छता बनी बड़ी चुनौती -: हालांकि, मंदिर समिति के सामने कई चुनौतियां भी हैं। मंदिर के आसपास अतिक्रमण के साथ सबसे बड़ी समस्या कचरा प्रबंधन की है। स्थानीय लोगों द्वारा मंदिर के मुख्य द्वार के सामने लगातार कूड़ा-कचरा फेंके जाने से गंदगी का अंबार लग गया है।करीब एक माह पूर्व स्वच्छता अभियान के तहत यहां से कचरे का उठाव कराया गया था, लेकिन स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है।समिति अध्यक्ष सन्नी भगत, कोषाध्यक्ष रोशन भगत और बबलू भगत ने बताया कि कचरे के कारण मंदिर में पूजा करने आने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है। जल्द ही कचरे का निस्तारण कराया जाएगा। उन्होंने लोगों से मंदिर परिसर को स्वच्छ रखने में सहयोग करने की अपील की है।







