सुपौल,अंग भारत। नगर परिषद कर्मियों की पिछले कई दिनों से जारी हड़ताल जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार समाप्त हो गई है। सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक के साथ हुई एक उच्च स्तरीय वार्ता में यह निर्णय लिया गया कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की जाएगी और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कर्मियों ने अपने काम पर लौटने का फैसला किया है, जिससे शहर में ठप पड़ी सफाई व्यवस्था के जल्द बहाल होने की उम्मीद जग गई है।
हड़ताल का कारण
यह पूरा विवाद शहर के वार्ड संख्या 22 में नाला खुदाई के दौरान शुरू हुआ था। नगर परिषद के कर्मचारियों का आरोप है कि काम के दौरान अबू बकर नामक व्यक्ति ने जेसीबी चालक के साथ गाली-गलौज की और मारपीट की। इस दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा है। जब कर्मचारी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तो उन्हें भारी प्रशासनिक लापरवाही का सामना करना पड़ा।
पुलिस पर गंभीर आरोप
कर्मियों का कहना है कि जब वे अपनी आपबीती सुनाने एसटी-एससी थाना पहुंचे, तो उन्हें वहां से नगर थाना भेज दिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि नगर थाना पुलिस ने उनकी फरियाद सुनने के बजाय हीलाहवाली की। इस उपेक्षा से आक्रोशित होकर कुछ सफाईकर्मियों ने थाने के बाहर कचरा डाल दिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस ने प्रतिशोध की कार्रवाई करते हुए बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव और नगर परिषद क्लर्क असजद आलम के घर पर छापेमारी की। असजद आलम सहित 4-5 लोगों को हिरासत में लेने से कर्मियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
सक्रिय हुए जनप्रतिनिधि
हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को लोहिया नगर चौक पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। वार्ड पार्षदों, सफाईकर्मियों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सदर थाना पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उनका मुख्य मुद्दा यह था कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई क्यों की और दोषियों के बजाय पीड़ितों को ही क्यों निशाना बनाया गया। सुपौल नगर परिषद के चेयरमैन राघवेंद्र झा ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन के साथ बातचीत के लिए नेतृत्व किया और एक औपचारिक ज्ञापन डीएम को सौंपा।
डीएम का आश्वासन
जिलाधिकारी सावन कुमार ने वार्ता के बाद स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने देगा। उन्होंने कहा:
- पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी।
- जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई होगी।
- भविष्य में पुलिस और नगर परिषद कर्मियों के बीच तालमेल और मर्यादा बनी रहे, इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
शहर की वर्तमान स्थिति
पिछले कुछ दिनों में काम बंद रहने के कारण सुपौल की सड़कों और गलियों में कचरे का अंबार लग गया था। आम नागरिक बदबू और गंदगी के बीच रहने को मजबूर थे। अब जबकि हड़ताल खत्म हो गई है, उम्मीद की जा रही है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर शहर फिर से साफ-सुथरा दिखाई देगा।
“नगर परिषद कर्मचारियों की समस्याएं जायज थीं। हमने सकारात्मक चर्चा की है और पुलिस की कार्रवाई पर भी जो सवाल उठे हैं, उनकी जांच होगी। कानून अपना काम करेगा और किसी के साथ ज्यादती नहीं होगी।” – सावन कुमार, जिलाधिकारी, सुपौल।
न्याय की प्रतीक्षा
हालांकि धरना तो खत्म हो गया है, लेकिन सफाईकर्मियों और एसोसिएशन के सदस्यों की नजरें अब प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या वाकई दोषी थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी? यह सवाल अभी भी शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल, आम जनता ने राहत की सांस ली है कि हड़ताल खत्म हुई और शहर की व्यवस्था पटरी पर लौट रही है।








