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झखरा – खेसर बाजार सड़क निर्माण घटिया पुलिया कार्य को लेकर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, किया प्रदर्शन 

शंभूगंज/बांका/अंगभारत। शंभूगंज में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किए जाने से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। झखरा नहर मोड़ से खेसर बाजार तक लगभग नौ किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना में पुलिया निर्माण के दौरान बरती जा रही लापरवाही के चलते ग्रामीणों ने न केवल काम रुकवा दिया, बल्कि विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया। करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में घटिया सामग्री का इस्तेमाल स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

परियोजना का विवरण

बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड अंतर्गत झखरा नहर मोड़ से खेसर बाजार तक सड़क निर्माण का जिम्मा ग्रामीण कार्य प्रमंडल, बांका-1 को सौंपा गया है। यह सड़क क्षेत्र के किसानों के लिए लाइफलाइन की तरह है, क्योंकि यह सीधे उनके खेतों और बाजार को जोड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार, योजना के तहत पुल और पुलिया का निर्माण भी किया जाना है, ताकि सिंचाई व्यवस्था सुचारू बनी रहे। लेकिन, निर्माण स्थल पर जिस तरह की सामग्री और कार्यशैली अपनाई जा रही है, उसने पूरी परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का आक्रोश

मंगलवार को मेहरपुर गांव के पूर्वी भाग में पुलिया निर्माण का कार्य चल रहा था, जिसे देख ग्रामीण भड़क गए। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल अंकित कुमार, कुणाल कुमार, जितेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह और चुन्ना कुमार ने जमीनी स्तर पर हो रही धांधली की पोल खोल दी। इन लोगों का कहना है कि सड़क और पुलिया निर्माण में मानकों का पालन करना तो दूर, मूलभूत निर्माण तकनीकों को भी दरकिनार किया जा रहा है।

लापरवाही के साक्ष्य

  • छड़ों का अभाव: पुलिया की ढलाई में बिना सरिया (छड़) के कंक्रीट बिछाया जा रहा है, जो भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
  • निम्न स्तरीय सामग्री: ढलाई में साफ तौर पर मिट्टी युक्त बालू का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कंक्रीट की मजबूती शून्य हो जाती है।
  • सीमेंट में कटौती: मसाला तैयार करते समय सीमेंट की मात्रा बेहद कम रखी जा रही है, जो सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार का पुराना तरीका है।
  • पर्यवेक्षण का अभाव: ग्रामीणों का दावा है कि ढलाई का काम विभाग के किसी भी जिम्मेदार अभियंता की मौजूदगी के बिना करवाया जा रहा है।

भविष्य के लिए खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी इस घटिया निर्माण को नहीं रोका गया, तो बारिश के मौसम में पुलिया ध्वस्त हो जाएगी। चूंकि यह मार्ग किसानों के लिए आवागमन का मुख्य जरिया है, इसलिए पुलिया का मजबूत होना अनिवार्य है। मेहरपुर और झखरा बहियार के खेतों में जाने वाले किसानों के लिए यह रास्ता ही एकमात्र विकल्प है। यदि पुलिया अभी कमजोर बनी, तो भारी मशीनों और ट्रैक्टरों का इस पर से गुजरना असुरक्षित हो जाएगा।

अगली रणनीति

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि काम की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो वे इस मामले की शिकायत सीधे जिला पदाधिकारी (डीएम) और मुख्यमंत्री कार्यालय तक करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि साढ़े सात करोड़ की लागत वाली इस सड़क को ‘कागज पर’ नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत बनाया जाए। वे अब निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।

अधिकारी का पक्ष

इस पूरे मामले पर जब ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता रवि कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अभी पुलिया की सिर्फ निचली सतह (बेस) की ढलाई की जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रामीणों ने चिंता जताई है और वे स्वयं मौके पर पहुंचकर पूरे निर्माण कार्य की जांच करेंगे। कनीय अभियंता रवि कुमार ने आश्वासन दिया है कि मानकों के अनुरूप ही निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा और घटिया कार्य पाए जाने पर ठेकेदार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

“ग्रामीणों की संतुष्टि और सड़क की मजबूती विभाग की प्राथमिकता है। हम मौके पर जाकर जांच करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री तय मानकों के अनुसार हो।” – रवि कुमार, कनीय अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग

अब देखना यह है कि विभागीय आश्वासन के बाद काम में वाकई सुधार होता है या ग्रामीणों का संघर्ष लंबा चलेगा। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकारी योजनाओं के नाम पर हो रही इस धांधली को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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