शंभूगंज/बांका/अंगभारत। शंभूगंज थाना क्षेत्र के परमानंदपुर गांव में रिश्तों की मर्यादा तार-तार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ अनारवती देवी नाम की एक वृद्ध महिला को उनके अपने ही बेटों ने भोजन-पानी देना बंद कर दिया है और घर से बाहर निकाल दिया है। अपनी इस बदहाली के खिलाफ अनारवती देवी ने शंभूगंज थाना पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। यह मामला न केवल एक पारिवारिक विवाद है, बल्कि समाज के उस अंधेरे पहलू को भी उजागर करता है जहां बुढ़ापे का सहारा माने जाने वाले बच्चे ही सबसे बड़ा बोझ बन जाते हैं।
बेटों का अमानवीय व्यवहार
अनारवती देवी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके दो बेटे हैं—अशोक सिंह और दिलीप सिंह। दोनों ही शादीशुदा हैं और अपनी गृहस्थी में व्यस्त हैं। महिला का आरोप है कि बीते कुछ समय से उन्हें न केवल प्रताड़ित किया जा रहा है, बल्कि बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरसाया जा रहा है।
- भोजन और पानी मांगने पर गाली-गलौज और अपमान सहना पड़ता है।
- घर के सदस्यों द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है।
- शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उन्हें घर से बेदखल कर दिया गया है।
विवाद की जड़ और पृष्ठभूमि
अनारवती देवी का जीवन पिछले चार वर्षों से भारी संकट में है। उनके पति कृत्यानंद सिंह करीब चार साल पहले रहस्यमय ढंग से लापता हो गए थे। तब से आज तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। पति की गुमशुदगी ने पहले ही अनारवती देवी को अंदर से तोड़ दिया था, और अब बेटों के अमानवीय रवैये ने उनकी बची-खुची उम्मीदें भी खत्म कर दी हैं। ग्राम कचहरी के सरपंच के पास न्याय की गुहार लगाने के बाद भी उन्हें वहां से कोई समाधान नहीं मिला और अंततः उन्हें थाने की शरण लेनी पड़ी।
आरोपितों का अपना पक्ष
दूसरी ओर, इस मामले में जब अशोक सिंह और दिलीप सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी मां के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका दावा है कि यह पूरी कहानी उन्हें समाज में बदनाम करने और किसी साजिश के तहत कानूनी पचड़ों में फंसाने के लिए रची गई है। उन्होंने अपने ऊपर लग रहे इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए शंभूगंज थाना अध्यक्ष राज कुमार प्रसाद ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्थिति की संवेदनशीलता को समझते हुए दोनों पक्षों को थाने तलब किया है।
थाना अध्यक्ष राज कुमार प्रसाद ने स्पष्ट कहा है कि, “मामला काफी गंभीर है। हम दोनों पक्षों को सुनकर जांच कर रहे हैं। वृद्ध महिला को भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसका विशेष ख्याल रखा जाएगा और कानून के दायरे में रहकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
सामाजिक चिंता का विषय
परमानंदपुर गांव की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हमारी पारिवारिक मूल्य व्यवस्था किस दिशा में जा रही है। एक मां, जिसने पूरी जिंदगी अपने बेटों को पालने में खपा दी, आज उसी को एक वक्त की रोटी के लिए प्रशासन के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। क्या सिर्फ जमीन-जायदाद का विवाद ही मां-बेटे के पवित्र रिश्ते से ऊपर हो गया है?
आगे की राह
पुलिस जांच में यह साफ हो पाएगा कि आखिर इस विवाद का सच क्या है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया से इतर, इस मामले ने स्थानीय लोगों के बीच एक बहस छेड़ दी है। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और उनके सम्मान को बनाए रखना न केवल कानून की जिम्मेदारी है, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। पुलिस द्वारा की जा रही निष्पक्ष जांच से यह उम्मीद है कि अनारवती देवी को जल्द ही न्याय मिलेगा और उन्हें सुरक्षित माहौल में रहने का अधिकार प्राप्त होगा।








