नई दिल्ली,अंग भारत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण (फेज-1) का शनिवार को उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
‘उड़ान’ योजना से बढ़ी हवाई कनेक्टिविटी
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘उड़ान’ योजना को प्राथमिकता दी गई है, जिससे देश के दूरदराज क्षेत्रों तक हवाई कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि राजग सरकार के दौरान एयरपोर्ट और हवाई सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है, जिससे आम नागरिकों को फायदा मिल रहा है।
फेज-1 की प्रमुख विशेषताएं
करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में से एक है। फेज-1 में एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता 12 मिलियन होगी, जिसे भविष्य में 70 मिलियन तक बढ़ाया जा सकेगा। एयरपोर्ट में 3,900 मीटर लंबा रन-वे, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और एयरफील्ड लाइटिंग जैसी सुविधाएं हैं, जिससे हर मौसम में 24×7 संचालन संभव होगा।
मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट और कार्गो सुविधा
नोएडा एयरपोर्ट को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन के सहज एकीकरण वाला मल्टी-मॉडल हब बनाया गया है। एयरपोर्ट में एक अत्याधुनिक कार्गो हब भी शामिल है, जो शुरुआती तौर पर 2.5 लाख मीट्रिक टन सालाना कार्गो संभाल सकेगा और भविष्य में इसे 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकेगा। 40 एकड़ में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा भी बनाई गई है।
हरित और सांस्कृतिक डिजाइन
परियोजना को नेट-जीरो उत्सर्जन वाले एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया गया है। इसकी डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है, जिसमें घाट और हवेलियों की झलक देखने को मिलती है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में कार्य करेगा और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दबाव कम करेगा।
प्रधानमंत्री की पहल से वैश्विक एविएशन हब की ओर कदम
यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित यह एयरपोर्ट न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को भी नई गति देगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









