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सीटीसी में जवान की मौत पर हंगामा, साथियों का फूटा गुस्सा

पूर्वी सिंहभूम, अंग भारत | पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा स्थित कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर (सीटीसी) में प्रशिक्षण ले रहे एक जवान बजरंगी यादव की दुखद मौत के बाद परिसर में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया। मंगलवार को जवान के निधन की सूचना मिलते ही प्रशिक्षण ले रहे अन्य साथियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जमकर नारेबाजी की। इस घटना ने न केवल एक युवा सिपाही की जान ली, बल्कि सिस्टम के भीतर छिपे प्रशिक्षण के दबाव और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जवानों की नाराजगी को भी सतह पर लाकर खड़ा कर दिया है।

अस्पताल में हुई मौत

मृतक बजरंगी यादव मूल रूप से रांची जिला बल में तैनात थे और सीटीसी में कठोर प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजर रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वे पिछले एक सप्ताह से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन प्रशिक्षण की व्यस्तता के बीच शायद उनकी बीमारी को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार की दोपहर जब उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई, तो उन्हें आनन-फानन में यूसीआईएल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन शाम करीब 4 बजे जवान ने अंतिम सांस ली। प्रशासन का दावा है कि उपचार में कोई चूक नहीं हुई है, लेकिन परिवार और साथी इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं।

जवानों ने उठाए सवाल

इस घटना के बाद सीटीसी परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। जवानों के आक्रोश के मुख्य कारण कुछ इस प्रकार हैं:

  • स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव: बीमार होने के बावजूद समय पर उचित इलाज न मिलना।
  • छुट्टियों में कटौती: व्यक्तिगत या पारिवारिक आपातकालीन स्थिति में भी जवानों को छुट्टी नहीं दी जाती।
  • अत्यधिक मानसिक दबाव: प्रशिक्षण के दौरान दिए जाने वाले कठोर मानसिक और शारीरिक टॉर्चर से जवान हताश हैं।
  • प्रशिक्षण प्रणाली: प्रशिक्षण केंद्रों में जवानों के साथ किए जाने वाले व्यवहार में संवेदनशीलता की कमी।

परेड में देरी पर असंतोष

हंगामे के दौरान प्रशिक्षु जवानों ने पासिंग आउट परेड (POP) के बार-बार टलने पर भी अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। लंबे समय से चल रहे प्रशिक्षण और अनिश्चितता के कारण जवानों के बीच मानसिक तनाव का स्तर काफी बढ़ गया है। साथियों का कहना है कि वे महीनों से घर से दूर हैं और बार-बार तारीखें बढ़ने से उनका मनोबल टूट रहा है। यह असंतोष केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से दबी हुई शिकायतों का नतीजा है, जिसे प्रशासन ने अब तक नजरअंदाज किया है।

प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया?

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए वरीय अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। सीटीसी के एएसपी विजय आशीष कुजूर ने स्थिति को संभालने के लिए जवानों के साथ संवाद किया। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जवानों की शिकायतों को सुना जाएगा और प्रशिक्षण व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जाएंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार:

“जवान की मौत इलाज के दौरान हुई है। मामले को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न दें। पूरी घटना की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।”

सुधार की जरूरत

यह घटना सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्रों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या हमारी प्रशिक्षण व्यवस्था इतनी कठोर होनी चाहिए कि जवान शारीरिक रूप से बीमार होने पर भी इलाज के लिए तरसें? सरकार और पुलिस महकमे को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि जवानों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हो। केवल दिखावटी आश्वासन से काम नहीं चलेगा; एक पारदर्शी स्वास्थ्य नीति और मानवीय प्रशिक्षण दृष्टिकोण की आज नितांत आवश्यकता है ताकि दोबारा किसी ‘बजरंगी यादव’ को सिस्टम की भेंट न चढ़ना पड़े।

फिलहाल सीटीसी में एहतियातन अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और मृत जवान के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। राज्य प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है कि वह अपने जवानों का विश्वास फिर से कैसे बहाल करे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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