धोरैया (बांका),अंग भारत। बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र अंतर्गत रणगांव पंचायत के सरवा गांव में पुलिस ने एक बड़े अवैध हथियार निर्माण गिरोह का भंडाफोड़ किया है। बिहार एसटीएफ की खुफिया सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में बोध नारायण मंडल नामक व्यक्ति को मौके से गिरफ्तार किया गया है, जिसके घर से भारी मात्रा में अर्द्ध-निर्मित हथियार और घातक गोला-बारूद बनाने के उपकरण बरामद हुए हैं। इस छापेमारी ने क्षेत्र में चल रहे संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क को उजागर कर दिया है, जिस पर पुलिस की सख्त नजर है।
छापेमारी की सटीक योजना
पुलिस को 7 अप्रैल को बिहार एसटीएफ की आर्म्स सेल से गुप्त जानकारी मिली थी कि सरवा गांव में हथियारों की एक अवैध फैक्टरी चल रही है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए बांका के पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा ने तत्काल एक विशेष जांच टीम गठित की। बौसी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी इंद्रजीत बैठा के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी की और बोध नारायण मंडल के घर पर अचानक छापा मारा। यह ऑपरेशन इतना सटीक था कि आरोपी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
मिले घातक हथियार उपकरण
पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो वहां हथियारों की एक छोटी फैक्टरी जैसी स्थिति मिली। बरामदगी की सूची काफी लंबी है, जो यह दर्शाती है कि आरोपी पेशेवर तरीके से हथियारों का निर्माण कर रहा था:
- दो अर्द्ध-निर्मित पिस्टल और उनसे जुड़े बैरल।
- पिस्टल के विभिन्न पार्ट्स जैसे स्लाइड, बॉडी और बट के तीन हिस्से।
- “HPM 32” मार्क वाली सात जिंदा गोलियां।
- हथियार बनाने में काम आने वाले फॉर्मा और गुनिया।
- लोहे का सिकंजा, लेथ मशीन के पुर्जे और ड्रिल बिट्स।
- ग्राइंडर मशीन और अन्य आधुनिक तकनीकी औजार।
आरोपी का पिछला इतिहास
पकड़ा गया आरोपी बोध नारायण मंडल कोई नया खिलाड़ी नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। वर्ष 2025 में भी उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था, जिसके चलते उसे पहले भी जेल की हवा खानी पड़ी थी। जमानत पर बाहर आते ही उसने फिर से अपराध की दुनिया में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। अब धोरैया थाना कांड संख्या 101/26 के तहत आर्म्स एक्ट की कई धाराओं में उस पर मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
जांच का दायरा बढ़ा
इस पूरे मामले में सिर्फ बोध नारायण की गिरफ्तारी ही आखिरी लक्ष्य नहीं है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में लगी है जहां से कच्चा माल आता था और कहां ये हथियार सप्लाई किए जाते थे। एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा, धोरैया थाना अध्यक्ष अमित कुमार, आसिफ अख्तर और सुनील कुमार सिंह की टीम अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।
क्यों है यह गंभीर?
इस तरह के अवैध निर्माण से समाज में अस्थिरता का खतरा बढ़ता है। जब भी स्थानीय स्तर पर हथियारों का निर्माण होता है, तो वे सीधे अपराधियों के हाथों में कम कीमत पर पहुंच जाते हैं। इससे क्षेत्र में लूट, हत्या और डकैती जैसी वारदातों के बढ़ने की आशंका बनी रहती है। पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल एक अवैध केंद्र का अंत हुआ है, बल्कि स्थानीय अपराधियों के हौसले भी पस्त हुए हैं।
“हमारी प्राथमिकता जिले को अपराध मुक्त बनाना है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस का आपसी तालमेल आगे भी ऐसे गिरोहों को नेस्तनाबूद करता रहेगा।” – स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार।
फिलहाल, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस पूरे मामले में अंतरराज्यीय गिरोह का हाथ है या यह किसी स्थानीय गैंग की कारस्तानी है। मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।








