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गर्मी बढ़ते ही भागलपुर से लौटने लगे प्रवासी पक्षी

भागलपुर,अंग भारत। मौसम में बदलाव के साथ ही भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल स्थित बिहपुर क्षेत्र का प्रसिद्ध गंगा दियारा इलाका एक बार फिर बदलने लगा है। शरद ऋतु के समाप्त होते ही जैसे-जैसे गर्मी का प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सुदूर ठंडे क्षेत्रों से आए प्रवासी पक्षी अब अपने प्रजनन स्थलों की ओर लौटने लगे हैं।

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घटोरा वेटलैंड में सर्दियों में उमड़ा था पक्षियों का जमावड़ा

बिहपुर के सोनवर्षा स्थित घटोरा वेटलैंड क्षेत्र हर साल सर्दियों में विदेशी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बन जाता है। बिहार जलपक्षी गणना के अनुसार इस वर्ष शरद ऋतु में यहां लगभग 12 हजार प्रवासी पक्षियों का आगमन हुआ था। सेंट्रल एशिया और साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों से आने वाले ये पक्षी यहां के अनुकूल मौसम और पर्याप्त भोजन के कारण कई महीनों तक निवास करते हैं।लेकिन अब तापमान में वृद्धि के साथ ही इन पक्षियों का वापसी का सिलसिला शुरू हो चुका है। जलाशयों और दलदली क्षेत्रों में दिखाई देने वाली इनकी चहचहाहट धीरे-धीरे कम होने लगी है।

कई दुर्लभ प्रजातियां रही आकर्षण का केंद्र

पर्यावरणविद और पक्षी विशेषज्ञ दीपक कुमार ‘झुन्नू’ के अनुसार इस बार भी कई प्रमुख प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें राजहंस, लालसर, तिदारी बत्तख, चैता, सिंकपर, कॉमन टील, कुशिया चाहा गडबाल और ग्रेलेग गूज प्रमुख रूप से शामिल रहे। ये सभी पक्षी सर्दियों में बड़ी संख्या में जलाशयों के आसपास देखे गए और पर्यटकों व पक्षी प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।उन्होंने बताया कि कुछ पक्षियों का वापसी का समय थोड़ा अलग होता है। ब्लैक-टेल्ड गाडविट, स्पॉटेड रेडशैंक और ग्रीनशैंक जैसे पक्षी अभी भी कुछ समय तक यहां रुकते हैं। इसका कारण यह है कि इन्हें दलदली क्षेत्रों में पर्याप्त भोजन मिल जाता है, जिससे ये देर से अपने प्रजनन स्थलों की ओर लौटते हैं।

अब शुरू हुआ स्थानीय पक्षियों का आगमन

प्रवासी पक्षियों के लौटने के साथ ही अब स्थानीय ग्रीष्मकालीन पक्षियों का आगमन भी शुरू हो गया है। क्षेत्र में कोयल और पपीहा की आवाजें गूंजने लगी हैं, जो गर्मी के मौसम के आगमन का संकेत देती हैं। इसके अलावा व्हाइट-टेल्ड स्टोनचैट, वेडर समूह के पक्षी, मत्स्यभक्षी और कीटभक्षी पक्षी भी अब इस इलाके में सक्रिय हो रहे हैं।दीपक कुमार ‘झुन्नू’ का कहना है कि घटोरा वेटलैंड का पक्षी संसार हर मौसम के साथ बदलता रहता है। सर्दियों में जहां विदेशी पक्षियों की चहल-पहल रहती है, वहीं गर्मियों में स्थानीय पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है। यही कारण है कि यह क्षेत्र हर ऋतु में पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

पर्यटन और जैव विविधता के लिए खास महत्व

घटोरा वेटलैंड न केवल पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है। हर साल यहां आने और लौटने वाले पक्षी प्राकृतिक चक्र और मौसम परिवर्तन का स्पष्ट संकेत देते हैं।स्थानीय लोग और प्रकृति प्रेमी इस बदलाव को करीब से महसूस करते हैं और हर मौसम में यहां की अलग-अलग छटा का आनंद उठाते हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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