पटना, अंग भारत। राजधानी पटना का जेपी गंगा पथ शुक्रवार को एक अद्भुत ऊर्जा का केंद्र बन गया, जहां ‘नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन’ के दौरान हजारों महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौड़ ने न केवल शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा दिया, बल्कि देश के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी का एक सशक्त संदेश भी दिया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम की शुरुआत की और इस आयोजन को नारी शक्ति के आत्मसम्मान का प्रतीक बताया। यह आयोजन ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ का एक हिस्सा था, जिसने यह साबित कर दिया कि बिहार की महिलाएं अब नेतृत्व की कतार में सबसे आगे खड़ी हैं।
नारी शक्ति का जुनून
जेपी गंगा पथ पर सुबह से ही उत्साह देखते ही बनता था। जब उपमुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ की शुरुआत की, तो पूरा वातावरण नारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस दौड़ में स्कूली छात्राओं से लेकर कामकाजी महिलाओं और गृहणियों तक ने हिस्सा लिया। वहां मौजूद महिला प्रतिभागियों का आत्मविश्वास यह बता रहा था कि वे बदलाव की सूत्रधार बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विधायक श्रेयसी सिंह की मौजूदगी ने इस आयोजन में और भी जोश भर दिया, जिन्होंने अतिथियों का स्वागत पारंपरिक रूप से किया।
महिला आरक्षण की अहमियत
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण विधेयक को देश के लिए एक गेम-चेंजर करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में महिलाओं की एक-तिहाई भागीदारी केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह निर्णय लेने की शक्ति को सीधे महिलाओं के हाथों में सौंपना है। उनके अनुसार:
- लोकसभा की सीटों का परिसीमन महिलाओं को नई पहचान देगा।
- नीति-निर्माण में महिलाओं का सीधा हस्तक्षेप विकास की गति तेज करेगा।
- संसद में 816 सीटों का अनुमानित ढांचा आधी आबादी को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बिहार का मॉडल
बिहार ने देश के अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क सेट किया है। पंचायत चुनाव से लेकर निकाय चुनावों तक में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर बिहार ने जमीनी स्तर पर नेतृत्व तैयार किया है। आज बिहार की पंचायतों में महिला मुखिया और वार्ड सदस्य जिस तरह से काम कर रही हैं, वह पूरे देश के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उपमुख्यमंत्री ने इस मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की ये नीतियां महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं, जिससे वे समाज के हर वर्ग में अपनी बात मजबूती से रख पा रही हैं।
आयोजन का व्यापक असर
इस दौड़ में केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि पटना के जागरूक नागरिक भी बड़ी तादाद में शामिल हुए। इस दौरान जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम और एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा जैसे अधिकारियों की उपस्थिति ने सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम स्थल पर हस्ताक्षर अभियान भी चला, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर अपना समर्थन दर्ज कराया।
भागीदारी के प्रमुख बिंदु
| प्रमुख अतिथि | उपस्थिति का कारण |
|---|---|
| उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी | मुख्य वक्ता एवं दौड़ की शुरुआत |
| विधायक श्रेयसी सिंह | खेल और नारी शक्ति को प्रोत्साहन |
| महापौर सीता साहू | स्थानीय निकाय में महिला सशक्तिकरण |
भविष्य की राह
इस तरह के आयोजन केवल एक दिन की कवायद नहीं होते। ये आयोजन समाज की उस मानसिकता को बदलने का काम करते हैं जो महिलाओं को केवल घर की चारदीवारी तक सीमित मानती थी। जब एक महिला सड़क पर दौड़ती है या नीति-निर्माण पर चर्चा करती है, तो वह पूरे समाज के लिए एक नया रास्ता खोलती है। विकसित भारत का सपना तब तक अधूरा है, जब तक आधी आबादी पूरी ताकत के साथ उसमें शामिल न हो। पटना की सड़कों पर दिखा यह जनसैलाब आने वाले बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलावों की एक साफ बानगी है।








