चित्तौड़गढ़,अंग भारत। सीपी जोशी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रवैया हमेशा से महिला विरोधी रहा है और जब देश में महिलाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अवसर आया, तब विपक्ष ने उसका समर्थन नहीं किया।
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जोर
सीपी जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस कानून से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे राष्ट्र निर्माण में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
कांग्रेस पर तीखा आरोप
सांसद जोशी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी की है, लेकिन जब वास्तविक सुधार का अवसर आया तो उसने विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस का “महिला विरोधी चेहरा” उजागर होता है।उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने देश की लगभग 50 प्रतिशत महिला आबादी की आकांक्षाओं के साथ अन्याय किया है।
राजस्थान की घटनाओं का जिक्र
जोशी ने राजस्थान में कांग्रेस शासन के दौरान महिलाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े और कई जिलों में गंभीर घटनाएं सामने आईं।उन्होंने आरोप लगाया कि अलवर, जोधपुर, भीलवाड़ा और उदयपुर जैसी जगहों पर हुई घटनाओं ने राज्य को शर्मसार किया, जबकि सरकार केवल जांच के वादे करती रही।
चुनावी नारे पर भी सवाल
उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के “लड़की हूं लड़ सकती हूं” नारे का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि राजस्थान की बेटियों के लिए वह नारा जमीन पर कितना असरदार साबित हुआ।
भाजपा सरकार का पक्ष
सीपी जोशी ने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करेगा।
राजनीतिक असर और निष्कर्ष
उन्होंने विश्वास जताया कि जनता आने वाले समय में कांग्रेस और विपक्षी दलों को उनके रवैये का जवाब देगी। साथ ही कहा कि यह कानून भारत के लोकतंत्र और महिला सशक्तीकरण के लिए एक नई दिशा तय करेगा।









