कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को सौंप दिया। अब वह भवानीपुर विधानसभा सीट से विधायक बने रहेंगे। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार दो विधानसभा सीटों से चुनाव जीतता है, तो परिणाम घोषित होने के 14 दिनों के भीतर उसे एक सीट छोड़नी होती है। इसी नियम का पालन करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली करने का निर्णय लिया। इससे पहले उन्होंने विधानसभा में शपथ ग्रहण के दौरान भवानीपुर सीट से विधायक के रूप में शपथ ली थी।
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नंदीग्राम सीट छोड़ी, भवानीपुर पर कायम
शपथ ग्रहण के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि वह दो सीटों से विधायक के रूप में कार्य नहीं कर सकते और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत एक सीट छोड़नी होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि नंदीग्राम के लोगों के प्रति उनका जुड़ाव हमेशा बना रहेगा और वे क्षेत्र की उपेक्षा नहीं होने देंगे।नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद अब भवानीपुर सीट उनके पास रहेगी। इस फैसले को राजनीतिक विश्लेषक रणनीतिक कदम के रूप में देख रहे हैं। नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटें पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी अहम मानी जाती हैं।
शपथ के बाद रोड शो, जनता का आभार
विधानसभा में शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर क्षेत्र में रोड शो भी किया। यह रोड शो चेतला लॉकगेट से कैमैक स्ट्रीट तक निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। पूरे मार्ग में लोगों ने उन पर फूल बरसाकर स्वागत किया।शुभेंदु अधिकारी ने भी वाहन से गुलाब की पंखुड़ियां फेंककर जनता का अभिवादन स्वीकार किया और लोगों का आभार जताया। इस दौरान माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा और समर्थकों में भारी जोश देखने को मिला।
अन्य सीटों पर भी राजनीतिक हलचल
इसी बीच आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने भी रेजिनगर सीट से इस्तीफा दे दिया है और उन्होंने मुर्शिदाबाद की नोआदा सीट अपने पास रखी है। उन्होंने घोषणा की है कि रेजिनगर उपचुनाव में उनके पुत्र गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया जाएगा।हालांकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से नंदीग्राम सीट पर होने वाले संभावित उपचुनाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस सीट को लेकर नई रणनीति सामने आ सकती है।नंदीग्राम सीट से इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है, जिससे राज्य की राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।










